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Delhi High Court का बड़ा फैसला: काउंसलिंग से पहले ही करनी होगी DNB सीटों की डी-रिजर्वेशन

Kittu Kumari30 July 20262 min read18 views
Delhi High Court का बड़ा फैसला: काउंसलिंग से पहले ही करनी होगी DNB सीटों की डी-रिजर्वेशन

दिल्ली एनसीआर के मेडिकल छात्रों और उम्मीदवारों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। Delhi High Court ने 29 जुलाई 2026 को दिए अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में DNB (Diplomate of National Board) सीटों की डी-रिजर्वेशन नीति को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरक्षित सीटों को अनारक्षित (de-reserve) करने की प्रक्रिया काउंसलिंग शुरू होने से पहले ही पूरी होनी चाहिए, न कि काउंसलिंग के बीच में। इस फैसले से जुड़ी विस्तृत जानकारी आप aninews.in पर देख सकते हैं।

  • Delhi High Court ने 29 जुलाई 2026 को DNB सीटों की डी-रिजर्वेशन पर अहम फैसला सुनाया।
  • यह फैसला जस्टिस दिनेश Mehta द्वारा दिया गया, जो NBEMS की अपील पर आया है।
  • अदालत के मुताबिक, आरक्षित श्रेणी के योग्य उम्मीदवार न मिलने पर काउंसलिंग से पहले ही सीटें डी-रिजर्व करनी होंगी।
  • काउंसलिंग शुरू होने के बाद बीच प्रक्रिया में सीटों को डी-रिजर्व करने का कोर्ट ने विरोध किया है।

कौंसलिंग शुरू होने से पहले पूरी करनी होगी प्रक्रिया

न्यायमूर्ति दिनेश मेहता (Justice Dinesh Mehta) की बेंच ने यह फैसला 18 मई 2026 को आए एक विभाजित फैसले के बाद दिया है। अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि यदि किसी विशेष मेडिकल विषय (specialty) के लिए आरक्षित श्रेणी का कोई योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं है, तो नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) को संबंधित राज्य सरकार से मंजूरी लेनी होगी। यह डी-रिजर्वेशन प्रक्रिया सीट मैट्रिक्स (seat matrix) के प्रकाशन और काउंसलिंग शुरू होने से पहले ही पूरी की जानी चाहिए। इससे ओपन कैटेगरी के छात्र इन सीटों को भर सकेंगे और कीमती मेडिकल सीटें खाली नहीं रहेंगी।

बीच काउंसलिंग में सीटों को डी-रिजर्व करने पर रोक

अदालत ने अपने आदेश में इस बात पर सख्त जोर दिया है कि एक बार सीट मैट्रिक्स जारी होने और छात्रों द्वारा अपनी पसंद (preferences) भरने के बाद, अदालतें काउंसलिंग प्रक्रिया के बीच में सीटों को डी-रिजर्व करने का निर्देश नहीं दे सकती हैं। कोर्ट का तर्क है कि ऐसा करने से अधिक मेधावी जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों के साथ अन्याय होता है और कम अंक वाले छात्रों को ज्यादा मेरिट वाले छात्रों से ऊपर एडमिशन मिल जाता है। इसके अलावा, इससे एकेडमिक कैलेंडर और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी प्रभावित होती है।

डॉ. अदिति पंवार के मामले में आया फैसला

इस अदालत के फैसले ने सिंगल जज के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें डॉ. अदिति पंवार (Dr. Aditi Panwar) नामक अनरिजर्व्ड उम्मीदवार को ओबीसी रेडियोडiagnosis सीट के डी-रिजर्वेशन का लाभ दिया गया था। कोर्ट के इस नए निर्देश से अब भविष्य की सभी DNB काउंसलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और समय पर सीटें भरी जा सकेंगी।

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