कक्षा 12 की परीक्षा में कैलकुलेटर के इस्तेमाल पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, CBSE से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीएसई से पूछा कि कक्षा 12 की गणित और अकाउंटेंसी परीक्षा में छात्रों को कैलकुलेटर इस्तेमाल करने की अनुमति क्यों नहीं दी गई।

बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कक्षा 12 की अकाउंटेंसी और गणित की परीक्षाओं में बेसिक, नॉन-प्रोग्रामेबल कैलकुलेटर के इस्तेमाल की अनुमति देने की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), केंद्र सरकार, NCERT और नेशनल असेसमेंट सेंटर (PARAKH) को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने सभी संबंधित पक्षों को छह सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी, 2027 को तय की गई है। यह याचिका विशाल दुआ और दस अन्य अभिभावकों द्वारा दायर की गई है, जिनमें छात्रों के हित और परीक्षा के बोझ को कम करने की बात कही गई है।
कैलकुलेटर की अनुमति पर क्यों छिड़ा विवाद?
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि सीबीएसई की करिकुलम कमेटी ने नवंबर 2024 में अपनी 70वीं बैठक के दौरान कक्षा 12 की अकाउंटेंसी परीक्षा में बेसिक कैलकुलेटर के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी। दावा किया गया है कि इस सिफारिश को दिसंबर 2024 में बोर्ड की गवर्निंग बॉडी के सामने भी रखा गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसे कभी आधिकारिक तौर पर लागू नहीं किया गया और न ही इसकी कोई अधिसूचना जारी की गई।
अभिभावकों का तर्क है कि गणित और अकाउंटेंसी जैसे विषयों में लंबे और समय लेने वाले मैनुअल कैलकुलेशन के कारण छात्र अपनी वैचारिक समझ (Conceptual Understanding) को सही ढंग से प्रदर्शित नहीं कर पाते। उनका कहना है कि यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 के अनुरूप होगा, जो रटने के बजाय उच्च-स्तरीय सोच (Higher-order thinking) पर जोर देते हैं।
इसके अलावा, याचिका में यह भी मांग की गई है कि कैलकुलेटर की सुविधा केवल 'डिस्कैल्कुलिया' (Dyscalculia) से पीड़ित छात्रों तक सीमित न रहकर अन्य दिव्यांग श्रेणियों के छात्रों को भी मिलनी चाहिए। कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीएसई के वकील ने कहा कि यह मामला फिलहाल विचाराधीन है और उन्होंने आगे के निर्देश लेने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है।