Unity Small Finance Bank को झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने बरकरार रखे BharatPe के शेयरधारक अधिकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने Unity Small Finance Bank की अपील खारिज कर BharatPe के शेयरधारक अधिकारों को बरकरार रखा है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में BharatPe की पैरेंट कंपनी 'रेज़िलिएंट इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड' (RIPL) के शेयरधारक अधिकारों को सुरक्षा प्रदान की है। कोर्ट ने यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक द्वारा दायर एक अपील को खारिज कर दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि बैंक अपने शेयरधारकों के साथ हुए समझौतों की अनदेखी नहीं कर सकता।
यह पूरा मामला 2021 के शेयरधारकों समझौते (SHA) से जुड़ा है। इस समझौते के तहत, बैंक और उसके प्रमोटर 'सेंट्रम ग्रुप' किसी भी 'आरक्षित मामले' (Reserved Matters) पर RIPL की लिखित सहमति के बिना एकतरफा फैसला नहीं ले सकते। बैंक ने इस नियम को दरकिनार करने की कोशिश की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
बैंक की दलीलों को कोर्ट ने बताया 'हताशा का तर्क'
6 नवंबर 2026 को जारी अपने आदेश में, दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने बैंक के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने बैंक द्वारा अनुबंधात्मक दायित्वों से बचने की कोशिशों को 'हताशा का तर्क' (argument of desperation) करार दिया। बैंक ने यह दावा किया था कि उसके 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' शेयरधारकों समझौते से ऊपर हैं, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि समझौते में मौजूद एक विशेष क्लॉज के कारण SHA ही प्रभावी रहेगा।
इसके अलावा, बैंक ने यह तर्क भी दिया था कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को इस समझौते पर आपत्ति हो सकती है, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि RBI की ओर से ऐसी कोई आपत्ति नहीं जताई गई है।
यह कानूनी लड़ाई मुख्य रूप से गवर्नेंस फ्रेमवर्क को लेकर है, ताकि यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक में BharatPe की 49% हिस्सेदारी सुरक्षित रहे। कोर्ट के इस फैसले से यह सुनिश्चित हुआ है कि बैंक ऐसी कोई कार्रवाई नहीं कर सकता जिससे शेयरधारकों के अधिकारों का हनन हो या मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन हो।