BharatPe की बड़ी जीत: दिल्ली हाई कोर्ट ने Unity Bank की अपील खारिज कर शेयरधारक अधिकारों को रखा बरकरार
दिल्ली हाई कोर्ट ने Unity Bank की अपील खारिज करते हुए BharatPe के शेयरधारक अधिकारों और SHA के नियमों को बरकरार रखा है।

वित्तीय सेवाओं और UPI भुगतान क्षेत्र की दिग्गज कंपनी BharatPe (RIPL) को दिल्ली हाई कोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है। कोर्ट की डिवीजन बेंच ने Unity Bank द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए BharatPe के शेयरधारक अधिकारों को सुरक्षित रखने वाले अंतरिम आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बैंक और उसके प्रमोटर, शेयरधारक समझौते (SHA) के नियमों की अनदेखी नहीं कर सकते।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने Unity Bank के उन तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें बैंक ने Reserved Matters (आरक्षित मामलों) पर सहमति मांगने को एक 'अनजाने में हुई गलती' बताया था। कोर्ट ने इस दलील को "हताशा का तर्क" (argument of desperation) करार दिया। अदालत ने गौर किया कि Unity Bank ने खुद लिखित में सहमति मांगी थी, जिससे यह साबित होता है कि वह अनुबंध की शर्तों से पूरी तरह वाकिफ था।
कोर्ट ने SHA के नियमों को माना सर्वोपरि
अदालत ने अपने फैसले में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया:
- लिखित सहमति अनिवार्य: कोर्ट ने दोहराया कि SHA के क्लॉज 8 के तहत, Reserved Matters पर कोई भी निर्णय लेने से पहले RIPL और Centrum की लिखित सहमति लेना अनिवार्य है।
- RBI का रुख: Unity Bank का यह दावा कि RBI ने SHA को खारिज कर दिया था, गलत पाया गया। कोर्ट ने कहा कि RBI ने इस समझौते पर कभी कोई आपत्ति नहीं जताई थी।
- AOA बनाम SHA: बैंक की इस दलील को भी खारिज कर दिया गया कि SHA, कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AOA) से ऊपर नहीं हो सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SHA का क्लॉज 8 इसे प्राथमिकता देता है।
इस फैसले के बाद BharatPe के प्रवक्ता ने कहा कि यह निर्णय गवर्नेंस फ्रेमवर्क और शेयरधारक अधिकारों की अहमियत को पुख्ता करता है। कंपनी ने उम्मीद जताई है कि बैंक का बोर्ड स्वतंत्र निर्णय लेगा और किसी भी बाहरी प्रभाव के बिना सभी हितधारकों, विशेषकर अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हितों की रक्षा करेगा।
BharatPe ने जोर देकर कहा कि 2021 में संयुक्त उद्यम (Joint Venture) की नींव जिन प्रतिबद्धताओं पर रखी गई थी, उनका सम्मान करना संस्थान के दीर्घकालिक हितों के लिए बेहद जरूरी है। अब Unity Bank को कोर्ट के निर्देशों का अक्षरश: पालन करना होगा और वह अनुबंधात्मक दायित्वों से बच नहीं सकता।