हेपेटाइटिस बी और सी की जांच के लिए दिल्ली सरकार लगाएगी 85 ट्रूनैट मशीनें

दिल्ली सरकार ने शहर में हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी की जांच व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने का फैसला किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मरीजों की समय पर पहचान करना और उन्हें बेहतर इलाज मुहैया कराना है। इसके लिए सरकार नेशनल ट्यूबरकुलोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम के तहत पहले से मौजूद 85 ट्रूनैट मॉलिक्यूलर टेस्टिंग मशीनों का इस्तेमाल करेगी, जिससे वायरल लोड टेस्टिंग की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र के प्रोग्राम डिवीजन को 2026-27 की अवधि के लिए कुल 5,000 चिप्स की मांग भेजी गई है, जिसमें हेपेटाइटिस बी के लिए 2,500 और हेपेटाइटिस सी के लिए 2,500 चिप्स शामिल हैं। नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम की सेंट्रल यूनिट ने पुष्टि की है कि केंद्र सरकार इन चिप्स की खरीद करेगी ताकि जांच के अंतराल को भरा जा सके और कार्यक्रम के लक्ष्यों को पूरा किया जा सके।
संसाधनों का बेहतर उपयोग और खास रणनीति
सरकार की रणनीति के मुताबिक, प्रत्येक जिले में एक ट्रूनैट मशीन को वायरल लोड टेस्टिंग के लिए निर्धारित किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया नेशनल ट्यूबरकुलोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम के स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर की मंजूरी के बाद लागू होगी। इस कदम से न केवल स्वास्थ्य संसाधनों का एकीकरण होगा, बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच तालमेल भी बेहतर होगा।
इस अभियान में विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और अन्य संवेदनशील समूहों की जल्द पहचान करने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही डायग्नोस्टिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए मोबाइल एक्स-रे सुविधाओं का भी उपयोग किया जाएगा।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संसाधनों को एक साथ जोड़कर मौजूदा बुनियादी ढांचे का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार सभी नागरिकों, विशेषकर हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए समय पर निदान और उचित उपचार सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जांच क्षमता को अधिकतम करने के लिए सरकार तकनीशियनों को प्रोत्साहित करने की योजना बना रही है। जरूरत पड़ने पर और काम के दबाव को देखते हुए, इन मॉलिक्यूलर टेस्टिंग मशीनों का उपयोग नियमित कामकाजी घंटों के बाद और छुट्टियों के दिन भी किया जा सकेगा। इस एकीकृत दृष्टिकोण से राजधानी में हेपेटाइटिस बी और सी के मामलों का पता लगाने और उनके प्रबंधन में काफी सुधार होने की उम्मीद है।