दिल्ली में भारी बारिश से थमी रफ्तार, सड़कों पर लगा लंबा जाम
दिल्ली में 61.4 मिमी बारिश से सड़कों पर लगा लंबा जाम, कई गाड़ियां खराब हुईं और AQI में आया सुधार।

राजधानी दिल्ली में हुई दिल्ली में भारी बारिश ने शुक्रवार को आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। 30 अक्टूबर को हुई मूसलाधार बारिश के कारण शहर के प्रमुख रास्तों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और लोग घंटों ट्रैफिक जाम में फंसे रहे। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, शुक्रवार सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों में 61.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई।
बारिश का सबसे ज्यादा असर झरोडा कलां में देखा गया जहां 89 मिमी बारिश हुई, जबकि लोधी रोड पर 63 मिमी और सफदरजंग में 56.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए गरज-चमक और भारी बारिश की चेतावनी दी थी, जिससे पहले येलो अलर्ट लागू था।
प्रमुख रास्तों पर रेंगती रहीं गाड़ियां, कई वाहन खराब
बारिश की वजह से आईटीओ, विकास मार्ग, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे, धौला कुआं, लक्ष्मी नगर और रिंग रोड जैसे व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक पूरी तरह चरमरा गया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, जाम की स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कई वाहन बीच सड़क पर ही खराब हो गए। अक्षरधाम फ्लाईओवर के पास दो भारी मालवाहक वाहन और एसडीए मार्केट के पास आउटर रिंग रोड पर एक डीटीसी बस खराब होने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
इसके अलावा, कई जगहों पर ट्रैफिक सिग्नल काम नहीं कर रहे थे, जिससे यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गईं। इस बीच कैब एग्रीगेटर्स ने सर्ज प्राइसिंग लागू कर दी और कैंसलेशन रेट्स में भी भारी बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट की वजह से दोपहर 1 बजे से आधी रात तक ट्रैफिक पुलिस ने विशेष प्रतिबंध लगाए थे, जिससे भीड़ प्रबंधन में चुनौती आई।
हालांकि, इस भारी बारिश का एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया। प्रदूषण से जूझ रही दिल्ली की हवा में सुधार हुआ और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) गिरकर 76 पर आ गया, जिसे 'संतोषजनक' श्रेणी में रखा गया है।
दूसरी ओर, दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने घोषणा की है कि 1 नवंबर 2026 से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत वाहनों के प्रवेश पर संशोधित प्रतिबंध लागू होंगे। इसके तहत उन वाहनों पर सख्ती बरती जाएगी जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते या जिनके पास वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं है।