दिल्ली हाई कोर्ट में बुजुर्ग महिला की याचिका, दत्तक पुत्र की कस्टडी CARA को सौंपने की मांग

Kittu Kumari22 September 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली हाई कोर्ट में बुजुर्ग महिला की याचिका, दत्तक पुत्र की कस्टडी CARA को सौंपने की मांग

दिल्ली में एक 56 वर्षीय विधवा महिला ने अपने 13 साल के गोद लिए हुए बेटे की कस्टडी सेंट्रल अडॉप्टशन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) या किसी अन्य सरकारी या निजी संगठन को सौंपने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महिला ने याचिका में बच्चे के आक्रामक व्यवहार, चोरी और हाइपरसेक्सुअल आदतों का हवाला दिया है। याचिका के अनुसार, घर में कोई वयस्क पुरुष सदस्य नहीं है, और परिवार में बुजुर्ग मां, विधवा बेटी और अविवाहित बहन रहती हैं। उनका कहना है कि वे अब इस बच्चे की देखभाल करने में असमर्थ और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। डॉक्टरों ने बच्चे में बौद्धिक विकलांगता (intellectual disability) की पुष्टि की है। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने इस मामले में केंद्र सरकार, CARA, बाल कल्याण समिति (CWC) और बच्चे को नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को तय की है।

असम के अनाथालय से 2018 में लिया था गोद

याचिका के मुताबिक, महिला और उसके दिवंगत पति ने 2018 में असम के एक अनाथालय से इस बच्चे को CARA के माध्यम से कानूनी रूप से गोद लिया था। दंपति का उद्देश्य एक परिवार बनाना और बच्चे को घर देना था। लेकिन कुछ ही महीनों बाद बच्चे का व्यवहार बदलने लगा। उसे एक स्कूल से निकाल दिया गया था और इसके बाद कई अन्य स्कूलों में भी ऐसी ही समस्याएं सामने आईं। परिवार को लगा कि यह किसी नए माहौल में ढलने की प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन समय के साथ स्थिति और बिगड़ती चली गई।

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पति के निधन के बाद और बढ़ीं मुश्किलें

मई 2021 में महिला के पति का निधन हो गया, जिससे परिवार की स्थिति और अधिक कमजोर हो गई। पति की मौत के बाद महिला अपनी मां के घर अलीगढ़ वापस लौट गई, जहां बच्चे का व्यवहार और अधिक आक्रामक हो गया। घर से पैसे और कीमती सामान गायब होने लगे। स्थिति इतनी बढ़ गई कि पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई, जिसे बाद में महिला ने वापस ले लिया क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि इतनी कम उम्र में बच्चा कानूनी पचड़े में फंसे। मेडिकल जांच में सामने आया कि बच्चा बौद्धिक विकलांगता और हाइपरसेक्सुअल व्यवहार से पीड़ित है, जिसके लिए विशेष देखभाल की आवश्यकता है।

कोर्ट से लगाई मेडिकल देखभाल और कस्टडी की गुहार

अपनी याचिका में महिला ने अदालत से मांग की है कि बच्चे की कस्टडी CARA या अदालत द्वारा उचित समझे जाने वाले किसी सरकारी या निजी संगठन को सौंप दी जाए। इसके साथ ही याचिका में CARA या CWC को यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वे बच्चे को सभी आवश्यक चिकित्सा और उपचार प्रदान करें। महिला ने यह भी कहा है कि वह अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार इस इलाज का खर्च उठाने के लिए तैयार है। इस मामले की मूल जानकारी ANI के माध्यम से सामने आई है।

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