दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें एनएसई की पूर्व प्रबंध निदेशक चित्रा रामकृष्णा को निचली अदालत से मिली जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। यह फैसला न्यायमूर्ति मधु जैन ने सुनाया। सीबीआई ने अपनी अपील में कहा था कि चित्रा रामकृष्णा ने अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर साल 2009 से 2017 के बीच एनएसई के कर्मचारियों के फोन अवैध रूप से टैप करवाए थे।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस काम के लिए आईसेक सर्विसेज नामक बाहरी कंपनी को काम पर रखा गया था और इस निगरानी को साइबर खतरों की जांच के रूप में छिपाया गया था। निचली अदालत ने दिसंबर 2022 में चित्रा रामकृष्णा को जमानत दे दी थी, जिसे चुनौती देते हुए सीबीआई हाई कोर्ट गई थी। इस मामले में चित्रा रामकृष्णा के साथ रवि नारायण, रवि वाराणसी और महेश हलिपुर का नाम भी शामिल है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इससे पहले 9 जुलाई 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सार्वजनिक कर्तव्य और लोक सेवक की परिभाषा को चुनौती देने वाली चित्रा रामकृष्णा की याचिका को भी खारिज कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि एनएसई जनता के महत्व के कार्य करता है और इसके शीर्ष अधिकारी को इन कार्यों से अलग नहीं किया जा सकता है। अदालत ने उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी को चुनौती देने वाली याचिका को भी खारिज कर दिया था।
अदालत के इस फैसले से अब चित्रा रामकृष्णा के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रहने का रास्ता साफ हो गया है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी इस मामले में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रहे हैं। सीबीआई का आरोप है कि चित्रा रामकृष्णा ने देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज की प्रमुख के रूप में अपने पद का दुरुपयोग किया था।