सरकारी अस्पतालों में करोड़ों की मेडिकल मशीनें बेकार, दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई चिंता

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी के सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये की महंगी मेडिकल मशीनें इस्तेमाल न होने पर गंभीर चिंता जताई है। शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनमीत पीएस अरोड़ा की स्पेशल बेंच ने इस खुलासे पर हैरानी जताई। कोर्ट द्वारा खुद आदेशित ऑडिट में सामने आया कि ग्लोबल स्तर पर प्रसिद्ध और जरूरी बहुत सी मशीनें विभिन्न कारणों से इस्तेमाल नहीं हो पा रही हैं (Source: PTI)।
ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए कारण
हाईकोर्ट में 5 अगस्त 2026 को सौंपी गई ऑडिट रिपोर्ट से पता चला कि मशीनों के इस्तेमाल न होने की मुख्य वजह टेक्निकल मैनपावर की कमी, जरूरी एक्सेसरीज और प्रिंसिपल इक्विपमेंट का न होना है। उदाहरण के लिए, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 15.42 करोड़ रुपये) की लागत वाला PET cyclotron अप्रैल 2022 से ट्रेंड स्टाफ की कमी के कारण बंद पड़ा है और उसका रेगुलेटरी लाइसेंस फरवरी 2024 में एक्सपायर हो चुका है। कोर्ट ने बताया कि अकेले इसी अस्पताल में 50-60 करोड़ रुपये की मशीनें बेकार पड़ी हैं। इसी तरह, गुरु तेग बहादुर अस्पताल में कोविड-19 के दौरान दान में मिले 400 वेंटिलेटर और 910 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर वर्तमान में इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं।
हेल्थSecretary को बुलाई गई बैठक
इन खुलासों के बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के हेल्थ Secretary को 17 अगस्त 2026 को सुबह 11:30 बजे एक अहम बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। इस बैठक में अस्पतालों के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट और Secretary (Services) शामिल होंगे, जो हर अस्पताल की स्थिति का विश्लेषण करके मैनपावर उपलब्ध कराने, इस्तेमाल न हो रही मशीनों को रीलोकेट करने और जरूरी एक्सेसरीज की खरीद के कदम उठाएंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका इरादा जांच शुरू करने का नहीं बल्कि इन मशीनों को चालू करने का है। 2017 में सरकारी अस्पतालों में क्रिटिकल केयर की कथित कमी को लेकर शुरू किए गए suo motu मामले के तहत इस मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 को तय की गई है।