दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, यूएपीए संपत्ति कुर्क आदेश के खिलाफ अपील सुनवाई योग्य

Kittu Kumari18 September 20262 min read7 viewsDelhi Local
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, यूएपीए संपत्ति कुर्क आदेश के खिलाफ अपील सुनवाई योग्य

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण यानी एनआईए अधिनियम की धारा 21 के तहत अपील सुनवाई योग्य है। यह फैसला गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 25(6) के तहत विशेष अदालत के उस आदेश के खिलाफ दिया गया है जिसमें आतंकवाद की कमाई से जुड़ी संपत्ति की जब्ती या कुर्की की पुष्टि की जाती है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर ड्यूडेजा की पीठ ने कहा कि यूएपीए की धारा 25(6) के तहत दिया गया आदेश अंतरिम आदेश नहीं है। यह आदेश संपत्ति की जब्ती या कुर्की के संबंध में संबंधित पक्ष के अधिकारों का अंतिम रूप से निर्धारण करता है। अदालत ने कहा कि एनआईए अधिनियम की धारा 21 विशेष अदालत के किसी भी फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ अपील का वैधानिक अधिकार देती है, सिवाय अंतरिम आदेश के। चूंकि धारा 25(6) के तहत दिया गया आदेश जब्ती या कुर्की के मुद्दे पर अंतिम फैसला करता है, इसलिए यह धारा 21 के दायरे में आता है। यह फैसला अकील अहमद द्वारा दायर की गई अपील पर सुनवाई के दौरान आया है। अकील अहमद ने पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश के सितंबर 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें पुणे के कोंढवा स्थित अशरफ नगर में संपत्ति की कुर्की की पुष्टि करने वाले प्राधिकारी के आदेश को बरकरार रखा गया था। सुनवाई के दौरान एनआईए ने इस अपील की स्वीकार्यता पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई थी और तर्क दिया था कि यूएपीए का अध्याय V आतंकवाद की आय को जब्त करने के लिए एक पूर्ण संहिता है। एनआईए ने दलील दी थी कि धारा 25(6) के तहत विशेष अदालत में अपील का प्रावधान है और एनआईए अधिनियम की धारा 21 के तहत दूसरी अपील की अनुमति देना प्रभावी रूप से दूसरा अपील बनाना होगा। साथ ही यह भी कहा गया था कि धारा 25(6) का आदेश अंतरिम प्रकृति का है। हाईकोर्ट ने एनआईए की इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि यूएपीए में संपत्ति की कुर्की और जब्ती के बीच अंतर किया गया है। पीठ ने यह भी देखा कि संपत्ति की साधारण कुर्की से स्वतः जब्ती नहीं होती है और धारा 26 के तहत जब्ती का आदेश पारित करने से पहले धारा 27 के तहत अलग से कारण बताओ नोटिस देना आवश्यक है। अदालत ने माना कि धारा 25 के तहत कुर्की और धारा 26 के तहत जब्ती कार्यवाही के दो अलग-अलग चरण हैं। अदालत ने यह भी नोट किया कि इससे पहले नसीम मोहसिन चौधरी बनाम एनआईए मामले में भी धारा 25(6) के आदेश के खिलाफ अपील की स्वीकार्यता को स्वीकार किया गया था। इस मामले की अगली अंतिम सुनवाई अब 2 दिसंबर 2026 को होगी और यह आदेश 15 सितंबर 2026 को अकील अहमद द्वारा दायर अपील पर पारित किया गया था।

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