दिल्ली हाई कोर्ट में प्रधानमंत्री मोदी के साथ महिला की एआई डीपफेक तस्वीर हटाने की याचिका पर होगी सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को एक याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। इस याचिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महिला की एआई-जनरेटेड और मॉर्फ्ड तस्वीर को तुरंत हटाने और ब्लॉक करने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति ताशी रबस्तान (अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार न्यायमूर्ति तेजेंदर सिंह ढींडसा, यहां न्यायमूर्ति तेज जस कारिया के रूप में पहचाने गए) की खंडपीठ ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की अनुमति दी।
याचिकाकर्ता की पहचान शिकायत में रिधिमा शर्मा के रूप में की गई है, हालांकि उनकी पहचान सुरक्षित रखी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के नेताओं ने अवैध रूप से उनकी तस्वीर हासिल की। याचिका के अनुसार, आरोपियों ने प्रधानमंत्री के साथ एक 'अशलील और आपत्तिजनक' छवि पर उनके चेहरे को सुपरइम्पोज़ करने के लिए एआई-आधारित फेस-स्वैपिंग टूल का इस्तेमाल किया। याचिकाकर्ता का दावा है कि जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान बैनरों पर यह डॉक्टर्ड सामग्री छापी गई और बाद में इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पोर्नोग्राफिक वेबसाइटों पर प्रसारित किया गया।
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील उमेश शर्मा ने अदालत को सूचित किया कि 23 सितंबर को शुरुआती शिकायत के बाद 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज किए जाने के बावजूद, अधिकारियों ने जिम्मेदार व्यक्तियों को गिरफ्तार नहीं किया है और न ही वायरल डीपफेक लिंक को हटाया है। एफआईआर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत दर्ज की गई थी।
याचिका में आरोपी सीजेपी नेताओं की पहचान सौरव दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के रूप में की गई है। याचिकाकर्ता ने इस घटना को डीपफेक जनरेशन के माध्यम से सार्वजनिक चरित्र हत्या के उद्देश्य से एक दुर्भावनापूर्ण, समन्वित साइबर-हमला बताया है।