नेताजी नगर: 50 साल पुराने शिव शक्ति मंदिर को ढहाने पर दिल्ली हाई कोर्ट की रोक

दिल्ली के नेताजी नगर इलाके में स्थित एक प्राचीन शिव शक्ति मंदिर पर मंडरा रहा खतरे का बादल फिलहाल टल गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने NBCC द्वारा मंदिर को खाली कराने और उसे ध्वस्त करने के लिए जारी किए गए नोटिस पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत का यह फैसला मंदिर के पुजारी द्वारा दायर की गई याचिका पर आया है, जिसमें नोटिस की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए गए थे।
पूरा मामला 1 अक्टूबर को शुरू हुआ, जब NBCC ने मंदिर को ढहाने का नोटिस जारी किया और 15 अक्टूबर तक की समय सीमा तय की। मंदिर के पुजारी संदीप कुमार भाटिया ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। याचिका में मुख्य रूप से यह बात कही गई कि प्रशासन ने बिना किसी 'कारण बताओ नोटिस' (Show-cause notice) के सीधे ध्वस्तीकरण का आदेश दे दिया, जिससे पुजारी को अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला।
धार्मिक आस्था और कानूनी खामियां
अदालत में दलील दी गई कि यह मंदिर पिछले 50 वर्षों से आस्था का केंद्र रहा है। पुजारी संदीप कुमार भाटिया ने बताया कि उनके दादा महंत मोती राम और फिर उनके पिता स्वर्गीय कुलदीप चंदर ने इस मंदिर की सेवा की, और अब वे खुद इसकी देखरेख कर रहे हैं। मंदिर में देवी दुर्गा, भगवान शिव और हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित हैं, साथ ही यहां महंत मोती राम जी का समाधि स्थल भी है।
याचिकाकर्ता के वकील अमित कुमार ने कोर्ट को बताया कि नवरात्रि के पावन अवसर पर मंदिर को ढहाने से न केवल श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचेगी, बल्कि मूर्तियों और समाधि स्थल को भी अपूरणीय क्षति होगी। इसके अलावा, यह भी मुद्दा उठाया गया कि नोटिस पर सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर और मोहर नहीं थे और न ही इसमें किसी धार्मिक समिति की मंजूरी का जिक्र था।
जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नोटिस के संचालन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी, तब तक मंदिर को सुरक्षित रखा जाएगा।