दिल्ली हाई कोर्ट ने डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन की सैलरी से रिकवरी पर लगाई रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन मकसूद अहमद की सैलरी से 5,000 रुपये की वसूली पर रोक लगाई है। जानें पूरा मामला।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली हाई कोर्ट ने डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन की सैलरी से रिकवरी पर लगाई रोक

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन मकसूद अहमद की सैलरी से 5,000 रुपये की वसूली करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस गिरीश कथपालिया ने यह आदेश 27 अक्टूबर 2026 को सुनाया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना किसी गंभीर गलती या जानबूझकर की गई लापरवाही के किसी अधिकारी पर व्यक्तिगत वित्तीय बोझ डालना उचित नहीं है।

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब एक एडिशनल सेशन जज ने 6 अक्टूबर 2026 को एक आदेश जारी किया था। दरअसल, अदालत में एक निर्धारित मामले की सुनवाई के दौरान कोई भी सरकारी वकील (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) पेश नहीं हुआ था। इस बात से नाराज ट्रायल कोर्ट ने जुर्माना लगाया और निर्देश दिया कि यह राशि सीधे तौर पर डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन मकसूद अहमद की सैलरी से वसूली जाए। इसी आदेश को चुनौती देते हुए अहमद हाई कोर्ट पहुंचे थे।

प्रॉसिक्यूटर्स की भारी कमी पर कोर्ट ने जताई चिंता

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सुनवाई के दौरान मकसूद अहमद की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट रमेश गुप्ता ने अदालत को बताया कि प्रॉसिक्यूशन विभाग इस समय सरकारी वकीलों की भारी कमी से जूझ रहा है। यह मामला पहले से ही हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच के सामने लंबित है। जस्टिस कथपालिया ने इस 'पुरानी समस्या' पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि वकीलों की इस कमी का सीधा असर आपराधिक मामलों के निपटारे और जमानत याचिकाओं पर पड़ रहा है।

अदालत ने यह भी माना कि ट्रायल कोर्ट के जज का फैसला संभवतः आपराधिक मुकदमों की मौजूदा स्थिति को लेकर उनकी हताशा का परिणाम था। हालांकि, हाई कोर्ट ने सरकार पर लगाए गए जुर्माने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, क्योंकि दिल्ली सरकार ने उस मूल आदेश को चुनौती नहीं दी थी।

अब दिल्ली सरकार को इस पूरे मामले पर एक विस्तृत जवाब और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यह रिपोर्ट अगली सुनवाई, जो 3 फरवरी 2027 को होनी है, उससे कम से कम एक हफ्ते पहले जमा कर दी जाए।

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