दिल्ली हाईकोर्ट ने 80 साल के बुजुर्ग को पेड़ लगाने के आदेश पर लगाई रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को दिल्ली सरकार के वन विभाग के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 80 साल के सेवानिवृत्त केंद्रीय अधिकारी गुरमेल सिंह भाटिया को 21 पेड़ लगाने का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने रोक लगाते हुए वन विभाग की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि आप ऐसा आदेश कैसे पास कर सकते हैं? आप कोई अदालत नहीं हैं।
यह कानूनी विवाद भाटिया द्वारा साल 1991 में अपने घर के बाहर लगाए गए एक नीम के पौधे से शुरू हुआ था। मई 2024 में आए एक तूफान के बाद पेड़ उखड़ने पर नगर निगम ने गिरे हुए हिस्से को हटा दिया था। इसके बाद, भाटिया के अलग रह रहे छोटे बेटे की शिकायत पर वन विभाग के पेड़ अधिकारी ने दिसंबर 2024 में कार्यवाही शुरू की। अगस्त 2026 में विभाग ने दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम (डीपीटी) के तहत आदेश जारी कर भाटिया को पास के स्थान पर 20 लंबे पौधे और मूल स्थान पर एक अतिरिक्त पेड़ लगाने का निर्देश दिया।
निर्देश में कहा गया था कि पौधे देशी प्रजाति के होने चाहिए, कम से कम छह फीट लंबे होने चाहिए और उनका कॉलर घेर 10 सेमी से कम नहीं होना चाहिए। साथ ही भाटिया को सात साल की अवधि तक उनकी देखभाल करने और उनके जीवित रहने को सुनिश्चित करने को कहा गया था। वकील आरके रुहिल द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए भाटिया ने अदालत को बताया कि उनकी अधिक उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के कारण वे शारीरिक रूप से पौधों की देखभाल करने में असमर्थ हैं। न्यायमूर्ति महाजन ने टिप्पणी की कि दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम खराब तरीके से तैयार किया गया प्रतीत होता है और जोर देकर कहा कि विभाग के पास किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध पेड़ लगाने के लिए मजबूर करने की कानूनी शक्ति नहीं है। हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार के वन विभाग से औपचारिक रूप से जवाब मांगा है।