दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रेडबुल को एनर्जी ड्रिंक लेबल हटाने के आदेश पर लगाई रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें रेडबुल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को अपने उत्पाद के लेबल से एनर्जी ड्रिंक शब्द हटाने को कहा गया था। इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अमित महाजन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि 30 जून 2026 का आदेश और उसके बाद राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भेजा गया 17 जुलाई 2026 का पत्र प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करके जारी किया गया था, क्योंकि नियामक ने कंपनी को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया था। न्यायमूर्ति महाजन ने FSSAI के इस रुख की आलोचना की कि 30 जून का पत्र केवल एक अनुरोध था और कहा कि आप किसी से अनुरोध नहीं करते, आप सरकार हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका यह निर्णय पूरी तरह से रेडबुल को जवाब देने का अवसर न दिए जाने की प्रक्रियागत चूक पर आधारित है, और अदालत ने इस बात पर कोई फैसला नहीं दिया है कि उत्पाद FSSAI अधिनियम का उल्लंघन करते हैं या नहीं। रेडबुल, जो साल 2002 से भारत में एनर्जी ड्रिंक लेबल का उपयोग कर रहा है, ने अपने बचाव में मार्च 2024 के FSSAI के एक परामर्श और अप्रैल 2024 के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान का हवाला दिया। रेडबुल की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने तर्क दिया कि कंपनी ने पहले भी नियामक के सामने अपनी बात रखी थी। FSSAI का यह तर्क था कि भारत में एनर्जी ड्रिंक के लिए कोई अधिसूचित मानक नहीं है और इसकी खाद्य श्रेणी प्रणाली लेबलिंग के उद्देश्य से नहीं है।
FSSAI ने इस मुद्दे पर अन्य निर्माताओं को भी नोटिस जारी किए थे, जिनमें पेप्सिको (एड्रेनालाईन रश के लिए), स्टिंग, मॉन्स्टर एनर्जी, हेल एनर्जी और रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (कंपा एनर्जी के लिए) शामिल हैं। अदालत ने FSSAI को यह छूट दी है कि वह नए सिरे से कार्यवाही शुरू कर सकता है और नया नोटिस जारी कर सकता है, बशर्ते नियामक उचित प्रक्रिया का पालन करे, जिसमें कारण बताओ नोटिस जारी करना और कंपनी को अपनी सफाई पेश करने का पूरा अवसर देना शामिल हो।