एनर्जी ड्रिंक लेबल पर विवाद: PepsiCo और Monster को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें PepsiCo और Monster Beverages को अपने उत्पादों पर 'एनर्जी ड्रिंक' लेबल लगाने से मना किया गया था। जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने यह आदेश सुनाते हुए कंपनियों को राहत दी है, हालांकि कुछ शर्तें भी लागू की गई हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि ये कंपनियां अपने मौजूदा स्टॉक को बाजार में बेच सकती हैं, लेकिन जब तक इस मामले पर अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक वे 'एनर्जी ड्रिंक' लेबल वाले नए उत्पाद नहीं बना सकेंगी। यह रोक अगली सुनवाई की तारीख 5 नवंबर तक प्रभावी रहेगी।
बिना नोटिस आदेश जारी करने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
इस पूरे विवाद की जड़ FSSAI द्वारा 30 जून, 2026 को जारी किया गया एक निर्देश है। रेगुलेटरी बॉडी का तर्क था कि भारतीय खाद्य नियमों के तहत 'एनर्जी ड्रिंक' नाम की कोई आधिकारिक उत्पाद श्रेणी या मानक मौजूद नहीं है, इसलिए उच्च कैफीन वाले पेय पदार्थों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। FSSAI इन्हें 'कैफिनेटेड बेवरेजेस' की श्रेणी में रखता है और 'शरीर और दिमाग को ऊर्जावान बनाना' या 'फोकस बढ़ाना' जैसे दावों पर भी रोक लगाता है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस महाजन ने FSSAI की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि नियामक संस्था ने प्रभावित कंपनियों को अपनी बात रखने का मौका दिए बिना या कोई कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) जारी किए बिना ही यह आदेश पारित कर दिया।
PepsiCo की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने दलील दी कि कंपनी के पास वैध विनिर्माण लाइसेंस है और लेबलिंग से जुड़ी पिछली सहमतियां विरोध के तहत दी गई थीं। दूसरी ओर, FSSAI के वकील सुरंश चौधरी ने दावा किया कि जुलाई के मध्य में हुई एक बैठक के दौरान उद्योग जगत इस लेबल को हटाने के लिए सहमत हो गया था।
गौरतलब है कि कोर्ट ने रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के 'कैम्पा एनर्जी ड्रिंक' को भी इसी तरह की राहत दी है, जिसमें रेड बुल के मामले में तय किए गए मिसाल (precedent) का हवाला दिया गया था।