बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाना कोर्ट का काम नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने मामला केंद्र सरकार को सौंपा

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस को रेगुलेट करना न्यायपालिका का आदेश नहीं बल्कि पॉलिसी का मामला है। अदालत ने यह मामला सेंट्रल गवर्नमेंट के पास भेज दिया है। जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीजन बेंच ने उस PIL का निपटारा कर दिया, जिसमें 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने जोर देकर कहा कि इस तरह के बैन या रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तय करना एग्जीक्यूटिव और लेजिस्लेचर का काम है। इस मामले की विस्तृत जानकारी के लिए ANI News पर देख सकते हैं।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को रोकना पॉलिसी का विषय है।
- यह PIL 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की मांग को लेकर दायर की गई थी।
- अदालत ने सेंट्रल गवर्नमेंट को सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा करके उचित पॉलिसी निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
PIL और याचिकाकर्ताओं की चिंताएं
यह PIL तीन साल के बच्चे की मां कीर्ति दुआ और paediatrician डॉ. शरद गुप्ता ने मिलकर दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने साइबरबुलिंग, Child Sexual Abuse Material (CSAM) जैसे हानिकारक कंटेंट और सोशल मीडिया की लत को लेकर चिंता जताई थी। उनकी याचिका में Economic Survey 2025-2026 के आंकड़ों का हवाला दिया गया था, जिसमें युवाओं में सोशल मीडिया की लत और उससे जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ने की बात कही गई थी। सुनवाई के दौरान, Facebook और Instagram की parent company Meta का प्रतिनिधित्व Senior Advocate अरविंद दातार ने किया।
केंद्र सरकार को निर्देश
बेंच ने सेंट्रल गवर्नमेंट को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों और सुझावों की जांच करे। सरकार से उम्मीद है कि वह कोई भी उचित पॉलिसी डिसीजन लेने से पहले सभी संबंधित सोशल मीडिया intermediaries और अन्य स्टेकहोल्डर्स से सलाह लेगी। अदालत ने सरकार के लिए इस फैसले तक पहुंचने के लिए कोई विशेष समयसीमा तय नहीं की है। इस बारे में अधिक जानकारी ANINews पर उपलब्ध है।