Delhi High Court का बड़ा फैसला: परीक्षा की पवित्रता बनाए रखना एग्ज़ामिनिंग बॉडी और कैंडिडेट्स दोनों की साझा जिम्मेदारी

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि महत्वपूर्ण परीक्षाओं की पवित्रता (Integrity) बनाए रखना एक साझा जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा है कि एडमिशन नियमों को सही तरीके से लागू करने के लिए एग्ज़ामिनिंग बॉडी (Examining Bodies) और कैंडिडेट्स (Candidates) दोनों ही जिम्मेदार हैं। 18 अगस्त 2026 को दिए गए अपने फैसले में जस्टिस जसमीत सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि न तो सिस्टम और न ही उम्मीदवारों को एक-दूसरे को हल्के में लेना चाहिए (Source: ANI News)।
डॉ. संचारी घोष की याचिका खारिज और जुर्माना
अदालत की यह टिप्पणी डॉ. संचारी घोष की याचिका को खारिज करने के बाद सामने आई, जिनकी FNB कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोफोलॉजी फेलोशिप की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी। कोर्ट ने पाया कि डॉ. घोष FET-2024 चक्र के लिए अयोग्य थीं क्योंकि उन्होंने 31 दिसंबर 2024 की कट-ऑफ तारीख तक अपनी DrNB कार्डियोलॉजी की योग्यता प्राप्त नहीं की थी। हालांकि उनका प्रोविजनल पास सर्टिफिकेट 29 मई 2025 तक जारी नहीं किया गया था, लेकिन उन्होंने एडमिशन प्रक्रिया के दौरान तीन अलग-अलग मौकों पर अपने ग्रेजुएशन वर्ष को गलत तरीके से पेश किया था। परिणामस्वरूप, अदालत ने उम्मीदवार पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
NBEMS पर प्रशासनिक सुस्ती के लिए जुर्माना
इसके साथ ही, अदालत ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल Sciences (NBEMS) की प्रशासनिक सुस्ती (Administrative lethargy) की भी आलोचना की। बोर्ड ने डॉक्टर घोष को उनकी अयोग्यता का पता लगाने से पहले नौ महीने से अधिक समय तक ट्रेनिंग से गुजरने की अनुमति दी, जिसकी वजह से कोर्ट ने इस बॉडी पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
NEET-UG और UGC-NET से जुड़े अन्य मामले
इसी तरह के घटनाक्रमों में, दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 अगस्त 2026 को NEET-UG पुनरीक्षण (Re-examination) में कथित अनियमितताओं की जांच करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिका में व्यक्तिगत और सामान्य शिकायतों को अनुचित तरीके से मिलाया गया था। इसके अलावा, उसी दिन केंद्र ने अदालत को सूचित किया कि पेपर लीक और प्रश्नावली की त्रुटियों की रिपोर्ट के बाद सोशियोलॉजी, इंग्लिश और कॉमर्स के लिए UGC-NET जून 2026 की री-एग्जामिनेशन सितंबर में होगी।