दिल्ली हाईकोर्ट ने पीजी और किराए के कमरों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए मांगा जवाब

Kittu Kumari30 September 20263 min read4 viewsDelhi Local
दिल्ली हाईकोर्ट ने पीजी और किराए के कमरों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए मांगा जवाब

दिल्ली में छात्रों के रहने की जगहों जैसे पीजी, किराए के फ्लैट और प्राइवेट हॉस्टल की सुरक्षा को लेकर एक नया जनहित मुकदमा (PIL) दायर किया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में बुधवार को सभी संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे 14 अक्टूबर 2026 को पहले से लंबित मामलों के साथ सूचीबद्घ करने का निर्देश दिया है। अदालत में इस याचिका पर सुनवाई के दौरान वकील आशु बिधूड़ी पेश हुए। यह याचिका दिल्ली यूनिवर्सिटी के पीजीडीएवी कॉलेज के दूसरे साल के छात्र शिवांश कालिया द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता खुद दिल्ली के राजौरी गार्डन में किराए के मकान में रहता है। यह याचिका 6 सितंबर को हुए सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद दायर की गई है, जिसमें पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। याचिका में कॉलेज, यूनिवर्सिटी और छात्र-कोचिंग हब स्तर पर छात्र आवास सलाहकार और निगरानी समितियों के गठन की मांग की गई है।

बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए दिल्ली आते हैं जो सीमित हॉस्टल सुविधा के कारण पीजी, किराए के फ्लैट और प्राइवेट हॉस्टल पर निर्भर रहते हैं। छात्रों के पास असुरक्षित इमारतों, आग के खतरों, भीड़भाड़, साफ-सफाई की कमी, शोषण और उत्पीड़न जैसी समस्याओं की रिपोर्ट करने का कोई तंत्र नहीं है। सत्य निकेतन इमारत ढलने की घटना को इस नई याचिका का तुरंत कारण बताया गया है। याचिका के अनुसार इस घटना ने छात्र आवास के रूप में उपयोग होने वाली इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा और नियामक निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। याचिका में हादसे से पहले किए गए निर्माण और नवीनीकरण कार्य तथा इमारत की स्वीकृत संरचना पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की 7 सितंबर की उन टिप्पणियों का भी हवाला दिया है जिसमें अदालत ने कहा था कि ऐसे हादसों की जिम्मेदारी केवल पीजी मालिक की नहीं बल्कि यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और एमसीडी की भी है।

याचिका में प्रस्ताव दिया गया है कि इन समितियों में 24 घंटे चलने वाली छात्र हेल्पलाइन, ईमेल आईडी और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल होना चाहिए। समितियां एमसीडी, दिल्ली फायर सर्विसेज, पुलिस और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर समय-समय पर सुरक्षा जांच करेंगी। असुरक्षित या अनधिकृत आवासों को कार्रवाई के लिए संबंधित वैधानिक अधिकारियों के पास भेजा जा सकता है। इन समितियों में शिक्षण संस्थानों, छात्रों, पुलिस, जिला प्रशासन, एमसीडी और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव है। अंतरिम आवेदन में तत्काल उपाय के रूप में छात्रों की शिकायतें लेने और अधिकारियों के साथ समन्वय करने के लिए एक तंत्र बनाने की मांग की गई है। साथ ही मुख्य शिक्षा और कोचिंग हब में रहने वाले छात्रों के निजी आवासों की सुरक्षा का आकलन करने को कहा गया है।

इस जनहित याचिका में पीजी, किराए के आवास और प्राइवेट हॉस्टल के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है। इस ढांचे में सुरक्षा, संरक्षा, रहने की स्थिति, स्वच्छता, संरचनात्मक और अग्नि सुरक्षा, शिकायत निवारण और शोषण से सुरक्षा शामिल होनी चाहिए। इस मामले में प्रतिवादी के रूप में दिल्ली सरकार, एमसीडी, दिल्ली पुलिस, जीजीएसआईपी यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी, पीजीडीएवी कॉलेज, यूजीसी, शिक्षा मंत्रालय, जेएनयू और डॉ. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली को शामिल किया गया है। यह पूरी जानकारी ANI के इनपुट पर आधारित है।

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