Delhi High Court का बड़ा कदम: Legal Aid Beneficiaries को Free Forensic Experts देने पर मांगे जवाब

बुधवार, 19 अगस्त 2026 को, Delhi High Court ने National Legal Services Authority (NALSA) और Central Government को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एक Public Interest Litigation (PIL) पर दिया गया है, जिसमें legal aid का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के लिए free forensic experts उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस याचिका को वकीलों Zeeshan Ekhlaque और Aman Bhide ने दायर किया है, जो economically disadvantaged litigants के सामने आने वाली उन चुनौतियों का समाधान करती है जो Bharatiya Sakshya Adhiniyam (BSA), 2023 की आवश्यकताओं का पालन करने में आती हैं।
- Delhi High Court ने NALSA और Central Government को जारी किए नोटिस।
- वकीलों Zeeshan Ekhlaque और Aman Bhide ने दायर की Public Interest Litigation (PIL)।
- Legal aid beneficiaries के लिए free forensic experts की मांग।
Section 63 of BSA और Electronic Evidence की चुनौतियां
इस विवाद का मुख्य केंद्र Section 63 of the BSA है, जिसके तहत electronic evidence जमा करने के लिए विशिष्ट प्रमाणन (specific certification) अनिवार्य किया गया है। इस प्रक्रिया में अक्सर technical forensic expert की सहायता की आवश्यकता होती है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि free legal aid पर निर्भर रहने वाले लोग अक्सर इस तरह की विशेषज्ञता का खर्च उठाने में असमर्थ होते हैं, जिससे संभावित रूप से उन्हें justice तक equal access से वंचित होना पड़ सकता है।
Court की टिप्पणी और NALSA को निर्देश
Chief Justice Devendra Kumar Upadhyaya और Justice Tejas Karia की Division Bench ने 'prima facie' राय व्यक्त की कि marginalized individuals का Section 63 के evidentiary standards को पूरा करने में असमर्थ होना उनके fundamental right to justice का उल्लंघन कर सकता है। अदालत ने NALSA को इस मामले का मूल्यांकन करने और इन procedural barriers को दूर करने के लिए एक संभावित योजना प्रस्तावित करने का निर्देश दिया है।
Background Records और DSLSA की प्रतिक्रिया
Background records से पता चलता है कि याचिकाकर्ताओं ने इससे पहले अप्रैल 2026 में Delhi State Legal Services Authority (DSLSA) से संपर्क किया था। उस समय, DSLSA ने जवाब दिया था कि legal aid lawyers आवश्यक प्रमाण पत्र तैयार करने के लिए सुसज्जित हैं और यह सुझाव दिया था कि specialized forensic assistance की समीक्षा case-by-case basis पर की जा सकती है। हालांकि, वर्तमान PIL एक अधिक standardized mechanism की मांग करती है ताकि equitable representation सुनिश्चित किया जा सके।