Delhi High Court: दिल्ली यूनिवर्सिटी से जवाब तलब, DUSU चुनाव में विजय जुलूस पर रोक के उल्लंघन का मामला

नई दिल्ली में दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी से जवाब मांगा है। अदालत में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया गया है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ यानी DUSU चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों ने अदालत के उस आदेश का उल्लंघन किया है जिसमें विजय जुलूस निकालने पर रोक लगाई गई थी। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता प्रशांत मनचंदा ने अदालत में पेश होकर यह जानकारी दी कि आदेश के बावजूद कुछ विजयी उम्मीदवारों ने चुनाव परिणाम आने के बाद विजय जुलूस निकाले जो अदालत की अवमानना है। अदालत ने कहा कि सभी DUSU उम्मीदवारों को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट कीर्ति उपल ने अदालत को बताया कि चुनाव जीतने के बाद कई बार भावनाओं पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि इस साल ढोल भी नहीं बजाए गए थे। इस पर अदालत ने साफ किया कि मुख्य मुद्दा ढोल या जश्न का नहीं बल्कि धन और बाहुबल के प्रदर्शन का है। अदालत ने कहा कि मामला नियमों के उल्लंघन और शक्ति प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। बेंच ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे कथित उल्लंघनों से जुड़ी सभी जरूरी सामग्री को तैयार करके अदालत के सामने फाइल करें।
यह पूरी कार्रवाई प्रशांत मनचंदा द्वारा 2017 में दायर की गई एक पुरानी याचिका से जुड़ी है जिसमें सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले उम्मीदवारों पर कार्रवाई की मांग की गई थी। 18 सितंबर को हुई पिछली सुनवाई में अदालत ने सभी छात्र संगठनों और DUSU चुनाव लड़ने वाले 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी करके पूछा था कि क्यों न उन पर चुनावी नुकसान की भरपाई के लिए जुर्माना लगाया जाए। अदालत ने पहले ही साफ कर दिया था कि चुनाव परिणामों के बाद कोई भी विजय जुलूस नहीं निकाला जाएगा और दिल्ली पुलिस को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई थी कि नियमों का सख्ती से पालन हो।