Delhi High Court का बड़ा फैसला: महिला के कपड़ों का चुनाव उसका निजी फैसला है

Kittu Kumari17 August 20262 min read71 viewsDelhi Local
Delhi High Court का बड़ा फैसला: महिला के कपड़ों का चुनाव उसका निजी फैसला है

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया है कि महिला के कपड़ों का चुनाव उसका एक बुनियादी निजी फैसला है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि समाज, पड़ोसियों और वकीलों को किसी भी महिला के पहनावे के बारे में तय करने या निर्देश देने का कोई अधिकार नहीं है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा द्वारा 10 अगस्त 2026 को यौन उत्पीड़न के आरोपी व्यक्ति की बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान की गई थी। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि महिला के कपड़े उसकी गरिमा को प्रभावित नहीं करते हैं और न ही उसके खिलाफ किसी भी तरह के दुर्व्यवहार को सही ठहराते हैं।

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  • महिला के कपड़ों का चुनाव उसका निजी फैसला है।
  • जींस पहनने से जुड़े बचाव पक्ष के तर्क को कोर्ट ने खारिज किया।
  • अदालत की कार्यवाही में कपड़ों, चरित्र या धर्म से जुड़े सवाल प्रतिबंधित किए गए।
  • निर्णय की प्रतियां दिल्ली ज्यूडिशियल एकेडमी और सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को भेजी गईं।
  • बचाव पक्ष के तर्क को किया खारिज

    अदालत ने बचाव पक्ष के उस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि जींस पहनने से छोटे लड़कों पर बुरा असर पड़ सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी महिलाओं की जीवनशैली पर नियंत्रण रखने की बजाय लड़कों को व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करना सिखाने की है। इसके परिणामस्वरूप, हाईकोर्ट ने यह निर्देश दिया है कि अदालत की कार्यवाही में किसी महिला के कपड़ों, उसके चरित्र या उसके धर्म से जुड़े सवाल पूछने पर रोक है, जब तक कि वे पूरी तरह से प्रासंगिक न हों।

    फैसले की प्रतियां अधिकारियों को भेजी गईं

    लंबी अवधि की संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, इस फैसले की प्रतियां न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए दिल्ली ज्यूडिशियल एकेडमी को भेजी गई हैं। इसके अलावा, व्यापक प्रसार के लिए इन प्रतियों को सभी Principal District and Sessions Judges को भी भेजा गया है।

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