दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नितिन नरेश और अन्य को कृषन रतन के खिलाफ मानहानि लेख छापने से रोका

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नितिन नरेश और अन्य प्रतिवादियों को टेरा इन्वेस्ट के सह-संस्थापक कृषन रतन के खिलाफ मानहानि से जुड़े कोई भी नए लेख प्रकाशित करने से रोक दिया है। यह अंतरिम आदेश न्यायमूर्ति सचिन दत्ता द्वारा 14 सितंबर 2026 को पारित किया गया है। यह मामला इन्वेंटिवा वेबसाइट पर प्रकाशित लेखों से जुड़ा हुआ है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम निर्देश प्रथम दृष्टया मामले और सुविधा के संतुलन को देखते हुए जारी किया गया है, हालांकि इससे प्रतिवादियों को आरोपों की तथ्यात्मक जांच जारी रखने से नहीं रोका जाएगा।
कृषन रतन ने मानहानि के इस मुकदमे में घोषणा, स्थायी और अनिवार्य निषेधाज्ञा के साथ-साथ हर्जाने की मांग की है। रतन के अनुसार, इन प्रकाशनों में धोखाधड़ी, बेईमानी, वित्तीय अनियमिता और कॉर्पोरेट कदाचार के आरोप लगाए गए थे, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। आदेश में इंग्लैंड और वेल्स के कमर्शियल कोर्ट की कार्यवाही का भी जिक्र है, जहां 5 अगस्त 2026 के एक सहमति आदेश के तहत उनके खिलाफ कार्यवाही बिना किसी धोखाधड़ी या गलत काम के निष्कर्ष के बंद कर दी गई थी।
हाईकोर्ट ने टेरा इन्वेस्ट की सह-संस्थापक अंकिता उदय बोस द्वारा दायर एक अन्य मुकदमे का भी हवाला दिया। अंकिता बोस के मामले में भी अदालत ने 24 अगस्त 2026 को प्रतिवादियों को लिंक्डइन या अन्य सोशल मीडिया पर ऐसे लेख प्रसारित करने से रोका था। अंकिता बोस जीलिंगो प्राइवेट लिमिटेड की सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ हैं, जिनकी सेवाओं को 2022 में समाप्त कर दिया गया था। बोस ने इन आरोपों को विवादित बताया है और कहा है कि उनके खिलाफ कोई भी न्यायिक दोषसिद्धि नहीं पाई गई है।
अन्याय और मानहानि के इन मामलों में अदालत ने प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली अदालत की सुनवाई 29 अक्टूबर 2026 को तय की गई है, जबकि संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष यह मामला 13 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध है। रतन और बोस से जुड़े ये दोनों मामले अलग-अलग हैं, लेकिन सुनवाई के दौरान दोनों के तर्कों और आदेशों का उल्लेख किया गया है।