बड़ी खबर: दिल्ली हाई कोर्ट ने बिहार की रियल एस्टेट कंपनी को 'Nintendo' नाम इस्तेमाल करने से रोका

Kittu Kumari6 August 20262 min read37 viewsNational
बड़ी खबर: दिल्ली हाई कोर्ट ने बिहार की रियल एस्टेट कंपनी को 'Nintendo' नाम इस्तेमाल करने से रोका

Delhi High Court ने 29 जुलाई 2026 को एक अंतरिम आदेश जारी किया है, जिसके तहत पटना, बिहार में रजिस्टर्ड रियल एस्टेट फर्म 'Nintendo India Private Limited' को अपने बिज़नेस ऑपरेशंस में "Nintendo" नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है। Justice Jyoti Singh के इस फैसले में कहा गया है कि बिहार की फर्म द्वारा इस नाम का इस्तेमाल जापानी गेमिंग दिग्गज Nintendo Co. Ltd. के trademark अधिकारों का उल्लंघन है और इससे आम जनता में भ्रम पैदा होने की संभावना है। इस आदेश से जुड़ी रिपोर्ट्स 1 अगस्त से 6 अगस्त 2026 के बीच सामने आईं।

जापानी कंपनी Nintendo Co. Ltd. की स्थापना 1889 में हुई थी और भारत में 1983 से इसके trademark रजिस्ट्रेशन मौजूद हैं। गेमिंग कंपनी को नवंबर 2025 में बिहार की फर्म द्वारा उसके नाम के इस्तेमाल का पता चला था। इसके बाद 17 फरवरी 2026 को एक cease-and-desist नोटिस जारी किया गया और फिर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। कोर्ट ने पाया कि Nintendo ने दशकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भारत में एक मजबूत reputation और goodwill बनाई है, जिससे Nintendo Switch, Game Boy, Super Mario Bros., Pokémon, और Donkey Kong जैसे प्रोडक्ट्स के लिए उसका मार्क काफी प्रसिद्ध हुआ है।

कोर्ट का फैसला और ट्रेडमार्क उल्लंघन

Justice Singh ने रियल एस्टेट फर्म द्वारा "Nintendo" के इस्तेमाल को "लगभग एक जैसा/भ्रामक रूप से समान" माना, जो भ्रम की उच्च संभावना और गेमिंग कंपनी की goodwill और reputation का फायदा उठाने के इरादे को दर्शाता है। कोर्ट ने Trade Marks Act, 1999 की Section 29(4) के तहत Nintendo के पक्ष में एक मजबूत prima facie case पाया, जो अलग-अलग बिज़नेस सेक्टर में भी प्रसिद्ध रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क की रक्षा करता है। कोर्ट ने कहा कि सुविधा का संतुलन Nintendo Co. Ltd. के पक्ष में था और तुरंत दखल न दिए जाने पर कंपनी को अपूरणीय क्षति (irreparable injury) उठानी पड़ती।

सुनवाई के दौरान, 'Nintendo India Private Limited' के एक डायरेक्टर ने लिखित रूप में यह स्वीकार किया कि कंपनी का भविष्य में इस मार्क का इस्तेमाल करने का कोई इरादा नहीं है। Delhi High Court ने बिहार की रियल एस्टेट फर्म को दो सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने का निर्देश दिया है।

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