दिल्ली हाईकोर्ट ने बेघर वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने वाली PIL पर फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को बेघर और विस्थापित वोटर्स को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में शामिल करने की मांग वाली जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने की (Source)।
याचिकाकर्ता की दलीलें और चुनाव आयोग का पक्ष
याचिकाकर्ता के वकील सीनियर एडवोकेट सत्यकाम ने कोर्ट में तर्क दिया कि 30 जून के निर्देशों में चुनाव आयोग (ECI) द्वारा बेघर वोटर्स के मुद्दे को स्वीकार करने के बावजूद, 2023 में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए विध्वंस के बाद विस्थापित हुए लोगों को शामिल करने के लिए कोई विशेष तंत्र नहीं बनाया गया है (Source)। जवाब में, ECI ने कहा कि बेघर होना आयोग की प्राथमिकता रहा है और उपयुक्त नीतियां पहले से मौजूद हैं। आयोग ने बताया कि बेघर लोग शेल्टर होम के पते का प्रमाण देकर फॉर्म 6 का उपयोग करके रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, और आंतरिक विस्थापन भी एक मान्यता प्राप्त चिंता है।
कोर्ट की टिप्पणी और सुझाव
सुनवाई के दौरान, बेंच ने टिप्पणी की कि "सब कुछ अदालतों पर नहीं थोपा जा सकता" और प्रणालीगत बहिष्करण के ठोस सबूत के बिना ECI की मौजूदा नीतियों के क्रियान्वयन की निगरानी करने में अनिच्छा व्यक्त की (Source)। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे कोई भी अतिरिक्त सुझाव सीधे चुनाव आयोग के सामने रखें, इस बात पर जोर देते हुए कि इन चिंताओं को दूर करने के लिए एक उचित तंत्र विकसित करना ECI की जिम्मेदारी है।