दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, लंबे समय तक किराया न देने पर किराएदार को नहीं मिलेगा मकान का मालिकाना हक

दिल्ली हाईकोर्ट ने किराएदार मोहम्मद महबूब की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उसने लंबे समय तक किराया न चुकाने के आधार पर संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा किया था। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने 7 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाते हुए महबूब की अपील को खारिज कर दिया और उसे संपत्ति खाली करने के पहले के आदेश को बरकरार रखा। इस जानकारी को 13 सितंबर 2026 को अपडेट किया गया था।
विवाद की पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति
संपत्ति के मालिक अर्शी कुरैशी और इरम ने 1992 में एक रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए इस संपत्ति को खरीदा था, जिसके बाद उन्होंने बेदखली का मुकदमा दायर किया था। यह संपत्ति मूल रूप से महबूब के पिता अल्लाह रखा को 20 रुपये प्रति महीने के किराए पर दी गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी वादकारी एक ही समय में दो विरोधाभासी कानूनी रुख नहीं अपना सकता है।
किराएदार के कानूनी अधिकार समाप्त
अदालत ने यह तय किया कि यदि कोई किराएदार मकान मालिक के मालिकाना हक को चुनौती देता है, तो वह उन कानूनी सुरक्षा उपायों को खो देता है जो आमतौर पर किराएदारों को मिलते हैं। परिणामस्वरूप, अदालत ने महबूब के इस तर्क को खारिज कर दिया कि लंबे समय तक किराया न चुकाने से उसे संपत्ति के मालिकाना हक मिल गए हैं।