नेहा बोरा को झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस की प्रिवेंटिव कार्रवाई के खिलाफ याचिका की खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज करते हुए पुलिस की प्रिवेंटिव कार्रवाई को सही ठहराया है।

Kittu Kumari23 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
नेहा बोरा को झटका, दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस की प्रिवेंटिव कार्रवाई के खिलाफ याचिका की खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट ने AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा दिल्ली हाई कोर्ट में दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने पुलिस द्वारा शुरू की गई प्रिवेंटिव प्रोसीडिंग्स (निवारक कार्यवाही) को चुनौती दी थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा जारी किया गया कारण बताओ नोटिस कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करता है और इसमें किसी भी तरह के कानूनी सुरक्षा उपायों का उल्लंघन नहीं हुआ है।

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 16 अक्टूबर को नेहा बोरा ने इंस्टाग्राम पर लोगों को मंडी हाउस में इकट्ठा होने का आह्वान किया था। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने निषेधाज्ञा के बावजूद विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में भी अनधिकृत प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने की कोशिश की। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, इससे सार्वजनिक शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका थी। इसी आधार पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था और बाद में मजिस्ट्रेट ने उन्हें 10,000 रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार पेश करने का नोटिस जारी किया।

अदालत की अहम टिप्पणी और कानूनी आधार

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने अपनी टिप्पणी में कहा कि मजिस्ट्रेट ने पुलिस रिपोर्ट, संबंधित अधिकारी के बयानों और उपलब्ध सबूतों पर विचार करने के बाद ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया। कोर्ट ने माना कि यह नोटिस BNSS के चैप्टर IX की आवश्यकताओं के अनुरूप है।

नेहा बोरा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी थी कि यह नोटिस कानूनी मानदंडों को पूरा नहीं करता और अपर्याप्त सामग्री पर आधारित है। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हालांकि नोटिस सही है, लेकिन मजिस्ट्रेट को यह स्वतंत्र रूप से तय करना होगा कि क्या वास्तव में बॉन्ड की आवश्यकता है या नहीं।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के 'मधु लिमाये बनाम एसडीएम' मामले का हवाला देते हुए कहा कि इस स्तर पर सुरक्षा उपायों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। अब यह मामला मजिस्ट्रेट के पास है कि वे आगे की जांच के बाद बॉन्ड या बेल बॉन्ड पर अंतिम निर्णय लें।

Share:

Comments

Leave a comment