मनी लॉन्ड्रिंग मामला: नयन रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- ED के साथ नहीं किया सहयोग

Kittu Kumari15 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
मनी लॉन्ड्रिंग मामला: नयन रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- ED के साथ नहीं किया सहयोग

दिल्ली हाई कोर्ट ने रियल एस्टेट कारोबारी नयन एन रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यह फैसला मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में सुनाया, जिसमें नयन रहेजा पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन का जवाब न देने और जांच में सहयोग न करने का आरोप था। जस्टिस अमित बंसल ने स्पष्ट किया कि आरोपी PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत जरूरी शर्तों को पूरा करने में विफल रहे हैं।

अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बार-बार समन जारी होने के बावजूद नयन रहेजा का ED के सामने पेश न होना उनके खिलाफ गया। कोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि वह इस अपराध में निर्दोष हैं या जमानत मिलने के बाद वह दोबारा ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे।

1,601 करोड़ रुपये के हेरफेर का है आरोप

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इस पूरे मामले की गंभीरता को समझें तो ED का दावा है कि होमबायर्स (घर खरीदारों) से मिले करीब 1,601.63 करोड़ रुपये के फंड को गलत तरीके से डायवर्ट किया गया है। एजेंसी का कहना है कि नयन रहेजा 'रहेजा डेवलपमेंट लिमिटेड' (RDL) और उससे जुड़ी संस्थाओं के कामकाज में गहराई से शामिल थे। ED ने अदालत को बताया कि आरोपी से कस्टोडियल पूछताछ जरूरी है ताकि जांच के दौरान मिले सबूतों का सामना कराया जा सके और यह पता लगाया जा सके कि पैसों का असली इस्तेमाल कहां हुआ।

मामले के कुछ मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • समन की अनदेखी: अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच ED ने उन्हें 9 समन भेजे थे, लेकिन वह पेश नहीं हुए।
  • बहानेबाजी: आरोपी ने कभी शहर से बाहर होने का दावा किया तो कभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति मांगी।
  • iPad की बरामदगी: अप्रैल 2026 में एक iPad जब्त किया गया था, जिसमें RDL के खर्चों और बिना बिके इन्वेंट्री की विस्तृत जानकारी मिली थी, जिसके बाद से रहेजा गायब रहे।
  • वादे से मुकरे: कोर्ट ने नोट किया कि रहेजा ने एक अलग याचिका में जांच में पूरा सहयोग करने का वचन दिया था, लेकिन बाद में उन्होंने इसे नजरअंदाज किया।

नयन रहेजा ने अपनी दलील में कहा कि फंड का इस्तेमाल वैध उद्देश्यों के लिए किया गया था, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि अग्रिम जमानत के स्तर पर 'मिनी-ट्रायल' नहीं चलाया जा सकता और यह तय करना कि ट्रांजेक्शन वैध थे या फंड डायवर्जन, जांच का विषय है। इससे पहले 19 सितंबर 2026 को सेशन कोर्ट भी उनकी याचिका खारिज कर चुका था।

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