दिल्ली हाई कोर्ट ने सिंगापुर के जोड़े की गोद लेने की याचिका खारिज की, CARA की बड़ी लापरवाही आई सामने

Kittu Kumari17 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली हाई कोर्ट ने सिंगापुर के जोड़े की गोद लेने की याचिका खारिज की, CARA की बड़ी लापरवाही आई सामने

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सिंगापुर के एक जोड़े द्वारा एक लावारिस बच्चे (बेबी के) को गोद लेने की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस मामले में सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) की गंभीर प्रशासनिक खामियों को उजागर किया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि केवल भावनात्मक लगाव या बच्चे को स्वीकार कर लेने से गोद लेने का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता, खासकर तब जब शुरुआती प्रक्रिया ही नियमों के खिलाफ हो।

अदालत ने पाया कि यह मामला 'एडॉप्शन रेगुलेशन 2022' का सीधा उल्लंघन था। कोर्ट ने कहा कि गोद लेने के लिए निर्धारित वैधानिक पात्रता मानदंडों का सख्ती से पालन होना चाहिए। इसे केवल संभावित कठिनाइयों या माता-पिता की भावनात्मक उम्मीदों के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जस्टिस शर्मा ने जोर देकर कहा कि बच्चे के कल्याण का आकलन केवल स्थापित कानूनी ढांचे के भीतर ही किया जाना चाहिए, न कि माता-पिता की इच्छाओं के आधार पर।

CARA की कार्यप्रणाली पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

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सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि प्रशासनिक चूक की वजह से बच्चे का रेफरल एक ऐसे जोड़े को दे दिया गया, जो गोद लेने के अनिवार्य मानदंडों को पूरा नहीं करते थे। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने CARA को भविष्य के लिए कई कड़े निर्देश जारी किए हैं:

  • रेफरल जारी करने से पहले संभावित माता-पिता की पात्रता की गहन जांच की जाए।
  • डिजिटल एडॉप्शन पोर्टल के माइग्रेशन से प्रभावित प्रोफाइल का व्यापक ऑडिट किया जाए।
  • एनओसी (NOC) जारी करने के लिए सख्त समय-सीमा का पालन हो।
  • आवेदन की स्थिति के रिकॉर्ड में सटीकता लाई जाए और किसी भी प्रक्रियात्मक चूक के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी तय की जाए।

कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के अंतरिम आदेश को हटाते हुए CARA को निर्देश दिया है कि अब बेबी के की कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया को तुरंत आगे बढ़ाया जाए।

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