दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के उम्मीदवार विजय शंकर मीणा की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मीणा ने चुनाव में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए डूसू 2026-27 के अध्यक्ष पद के चुनाव परिणाम को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने संबंधित अधिकारियों को मीणा के आरोपों की जांच करने और तय समय सीमा के भीतर उनके आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश दिया है। इस मामले की मूल जानकारी ANI के माध्यम से सामने आई है। याचिका में 19 सितंबर को घोषित परिणामों को चुनौती दी गई थी, जिसमें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उम्मीदवार यश डबास को 24,576 वोट पाकर डूसू अध्यक्ष चुना गया था। मीणा को 22,523 वोट मिले थे और डबास ने 2,053 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। यह याचिका वकीलों विमल त्यागी और बालाजी पाठक के जरिए दाखिल की गई थी। मीणा ने संविधान के अनुच्छेद 226 का हवाला देते हुए ईवीएम और गिनती के रिकॉर्ड सहित चुनाव से जुड़े दस्तावेज मांगे थे।
एनएसयूआई उम्मीदवार ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई गड़बड़ियों का आरोप लगाया था। याचिका के अनुसार, कुछ कॉलेजों के प्रिंसिपलों, प्रोफेसरों और प्रशासनिक स्टाफ ने संस्थागत निष्पक्षता बनाए रखने के नियमों के बावजूद विशेष उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ चुनाव अधिकारियों और यूनिवर्सिटी के फैकल्टी सदस्यों ने भी चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया, जो लिंगदोह समिति की सिफारिशों और डूसू आचार संहिता के खिलाफ था।
याचिका में विभिन्न कॉलेजों में मतदान प्रतिशत में अंतर का मुद्दा भी उठाया गया था। मीणा की याचिका के मुताबिक, 1.51 लाख से अधिक पात्र मतदाताओं में कुल मतदान 40.46 प्रतिशत था, जबकि कुछ कॉलेजों में मतदान प्रतिशत 80 प्रतिशत तक दर्ज किया गया। उन्होंने अदिति महाविद्यालय, भगिनी निवेदिता कॉलेज, स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, शिवाजी कॉलेज और मोतीलाल नेहरू कॉलेज (मॉर्निंग) जैसे कॉलेजों में मतदान के आंकड़ों पर सवाल उठाए थे।
मीणा ने दलील दी कि इन कथित गड़बड़ियों की जांच जरूरी है, खासकर तब जब अध्यक्ष पद का चुनाव 2,053 वोटों के अंतर से जीता गया हो। उन्होंने इससे पहले यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के सामने एक शिकायत देकर कथित गड़बड़ियों की जांच कराने और सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य चुनावी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की थी। एक अंतरिम आवेदन में उन्होंने पोलिंग बूथ, गिनती वाले क्षेत्रों और संबंधित कॉलेजों के आम कमोडिटी एरिया के सीसीटीवी फुटेज को तुरंत सुरक्षित रखने की मांग भी की थी, ताकि सामान्य समय सीमा के दौरान फुटेज को हटाया न जा सके। याचिका में वोटों की दोबारा गिनती और परिणाम पर रोक लगाने की मांग भी की गई थी। मीणा ने छात्र चुनावों को नियंत्रित करने वाली लिंगदोह समिति की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला दिया था। डूसू चुनाव में 52 मतदान केंद्रों पर 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। अध्यक्ष पद का चुनाव डबास ने जीता, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशू शौकीन ने उपाध्यक्ष पद हासिल किया। परिणाम आने के तुरंत बाद मीणा ने फर्जी और जबरन मतदान का आरोप लगाते हुए चुनाव को चुनौती देने का ऐलान किया था। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और संबंधित अधिकारियों को मीणा के आवेदन पर विचार कर तय समय में फैसला लेने का निर्देश दिया है।