दिल्ली उच्च न्यायालय ने एनएसयूआई उम्मीदवार की डूसू चुनाव याचिका पर दिया यह आदेश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को एनएसयूआई उम्मीदवार विजय शंकर मीणा की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। यह याचिका डूसू अध्यक्ष पद के चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए दायर की गई थी। न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने संबंधित अधिकारियों को मीणा के आरोपों की जांच करने और तय समय सीमा के भीतर उनके आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ताओं में वकील विमल त्यागी और बालाजी पाठक शामिल रहे।
चुनाव में धांधली और अनियमितता के आरोप
मीना ने 19 सितंबर को घोषित हुए परिणामों को चुनौती दी थी, जिसमें एबीवीपी के उम्मीदवार यश डबास को 24,576 वोट मिले थे और वे डूसू अध्यक्ष चुने गए थे। मीणा को 22,523 वोट मिले थे और डबास 2,053 वोटों के अंतर से जीते थे। याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ कॉलेजों के प्रोफेसरों और कर्मचारियों ने नियमों के खिलाफ जाकर चुनाव प्रचार किया। इसके अलावा विभिन्न कॉलेजों में मतदान प्रतिशत में अंतर का मुद्दा भी उठाया गया जहां कुछ जगहों पर मतदान 80 प्रतिशत तक दर्ज किया गया।
सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
मीना ने अपनी याचिका में ईवीएम और मतगणना के रिकॉर्ड की मांग की और लिंगदोह समिति की सिफारिशों का हवाला दिया। याचिका में मतदान केंद्रों और मतगणना क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज को तुरंत सुरक्षित रखने की मांग की गई थी ताकि वे डिलीट न हो सकें। अदालत ने याचिका पर सीधा विचार करने से इनकार कर दिया है और अब सक्षम प्राधिकारी ही इन सभी शिकायतों और आरोपों की जांच करेंगे।