राणा कपूर की किताब 'Yes Man' पर रोक हटी, दिल्ली हाई कोर्ट ने चार हिस्सों को हटाने के दिए निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने राणा कपूर की जीवनी 'Yes Man' के वितरण पर लगी रोक हटाई, लेकिन चार विवादित हिस्सों को हटाने की शर्त रखी है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने यस बैंक के पूर्व सह-संस्थापक राणा कपूर की जीवनी पर लगे प्रतिबंध को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पवन चंद लाल द्वारा लिखित और हार्पर कॉलिन्स पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित किताब 'Yes Man: The Untold Story of Rana Kapoor' के वितरण और बिक्री पर लगी पूरी तरह से रोक को हटा दिया है। हालांकि, यह राहत पूरी तरह बिना शर्त नहीं है; कोर्ट ने किताब के चार विशिष्ट हिस्सों को मास्क (छिपाने) करने का आदेश दिया है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर ने कहा कि पूरी किताब पर प्रतिबंध लगाना बहुत ज्यादा कठोर कदम था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर किसी किताब के कुछ हिस्सों पर आपत्ति है, तो उस वजह से पूरी कृति के प्रकाशन और वितरण को नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने उन चार पैराग्राफों (ii, iv, vii और x) की पहचान की है, जिन्हें प्रथम दृष्टया मानहानिकारक या अपमानजनक माना गया है। अब इन चार हिस्सों को हटाकर किताब को बाजार में लाया जा सकता है।
तिस हजारी कोर्ट के पुराने आदेश में बदलाव
आपको बता दें कि इस किताब के वितरण पर जुलाई 2024 में तीस हजारी की एक ट्रायल कोर्ट ने रोक लगाई थी। यह आदेश राणा कपूर द्वारा दायर एक मानहानि मुकदमे के बाद आया था। यह किताब दिसंबर 2020 में पहली बार रिलीज हुई थी, लेकिन कानूनी विवादों के चलते इसकी बिक्री पर ब्रेक लग गया था।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि साहित्यिक कार्यों पर कानूनी रोक का दायरा सीमित होना चाहिए। अब इस संशोधित आदेश के बाद किताब का सर्कुलेशन दोबारा शुरू हो सकेगा, बशर्ते विवादित हिस्सों को हटा दिया जाए। गौरतलब है कि मानहानि का मुख्य मामला और उससे जुड़ी दलीलें अभी भी अदालत में लंबित हैं, जिनका अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।