Delhi High Court ने Lakshmi Yojana में MP और MLA की सिफारिश पर उठाए कड़े सवाल

Delhi High Court ने दिल्ली सरकार की Lakshmi Yojana के तहत आवेदन के लिए स्थानीय Member of Parliament यानी MP या Member of Legislative Assembly यानी MLA की सिफारिश अनिवार्य करने की शर्त पर सवाल उठाए हैं। Chief Justice Devendra Kumar Upadhyaya और Justice Tejas Karia की बेंच ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई में इस नीति को मनमाना बताया। अदालत ने कहा कि योजना की आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन में ऐसी किसी शर्त का कोई जिक्र नहीं है। अदालत ने यह भी सवाल किया कि जब आय, आयु (21 से 60 वर्ष) और 10 साल की निवास जैसी पात्रता की पुष्टि सामान्य दस्तावेजों के जरिए हो सकती है, तो आवेदकों को राजनीतिक समर्थन लेने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है।
Delhi Lakshmi Yojana का रजिस्ट्रेशन पोर्टल 1 अगस्त 2026 को लॉन्च हुआ था, जो पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की वित्तीय सहायता यानी सालना ₹30,000 देता है। मौजूदा प्रक्रिया के तहत, आवेदन जमा करने के लिए किसी विधायक या सांसद का हस्ताक्षर और मुहर वाला पत्र अनिवार्य दस्तावेज है। इस नियम को पूर्व कांग्रेस पार्षद Abhishek Dutt और वर्तमान पार्षद Vedpal Sheetal Chaudhary द्वारा दायर एक Public Interest Litigation यानी PIL में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह नियम राजनीतिक प्रतिनिधियों को असीमित छूट देता है और कल्याणकारी योजना को राजनीतिक संरक्षण का साधन बनाता है।
Delhi government का प्रतिनिधित्व कर रहे Additional Solicitor General Chetan Sharma ने अन्य राज्यों में ऐसी व्यवस्था का हवाला देकर और 6.1 लाख लाभार्थियों के पहले ही जुड़ने का दावा करते हुए इस नियम का बचाव किया। हालांकि अदालत ने इस पर संदेह जताते हुए कहा कि हम इसे मंजूरी नहीं दे सकते। बेंच ने इससे पहले 19 अगस्त 2026 को भी ऐसे ही चिंताएं जताई थीं और बताया था कि इस मौजूदा व्यवस्था में सिफारिशों के लिए कोई निश्चित समय सीमा या शिकायत निवारण तंत्र नहीं है।
योजना की पात्रता मानदंडों के अनुसार, इनकम टैक्स भरने वाले, GST फाइल करने वाले, सरकारी कर्मचारी, चार पहिया वाहन के मालिक या सालाना 2,400 यूनिट से अधिक बिजली की खपत करने वाले परिवार इस योजना के दायरे से बाहर हैं। इसके अलावा, आपराधिक रिकॉर्ड वाले या तीन से अधिक बच्चों वाले लोग भी पात्र नहीं हैं। लाभार्थियों के पास ₹2,00 से ₹1,500 फिक्स डिपॉजिट या पूरी राशि फिक्स डिपॉजिट में रखने का विकल्प है और साथ ही खर्च के लिए CBDC वॉलेट का विकल्प भी मौजूद है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर के लिए तय की है।