दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, स्कूल प्रिंसिपल मधुबाला जैन पर एससी-एसटी एक्ट के मामले को किया रद्द

Kittu Kumari27 August 20262 min read96 viewsDelhi Local
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, स्कूल प्रिंसिपल मधुबाला जैन पर एससी-एसटी एक्ट के मामले को किया रद्द

दिल्ली हाईकोर्ट ने 25 अगस्त 2026 को एक स्कूल प्रिंसिपल मधुबाला जैन के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों को रद्द कर दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी द्वारा सुनाया गया है, जिन्होंने इस याचिका को आंशिक रूप से मंजूर किया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को प्रिंसिपल के पति पी.सी. जैन के खिलाफ अन्य मामलों में आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इस पूरी खबर की विस्तृत जानकारी के लिए आप ANI News पर जा सकते हैं।

मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी प्रक्रिया

याचिकाकर्ताओं ने तीस हजारी स्थित स्पेशल कोर्ट के 8 मार्च 2022 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(x) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे। यह मामला 25 जून 2014 को स्कूल में हुई आग की एक घटना से जुड़ा है, जिसके बाद दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर ने इस मामले में हस्तक्षेप किया था। इंस्पेक्टर का आरोप था कि आग की जांच के दौरान रिश्वत को लेकर हुए विवाद के बाद प्रिंसिपल और उनके पति ने उन पर अपमानजनक और जातिसूचक टिप्पणियां की थीं।

DelhiBreakings की हर खबर सबसे पहलेJoin Channel

अदालत का फैसला और निष्कर्ष

न्यायमूर्ति बनर्जी ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कथित जातिसूचक टिप्पणियां जनता की नजरों में यानी पब्लिक व्यू में नहीं की गई थीं, जो एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(x) के तहत एक अनिवार्य कानूनी आवश्यकता है। अदालत ने माना कि निजी परिसरों या बंद दरवाजों के पीछे होने वाली घटनाएं इस कानूनी कसौटी पर खरी नहीं उतरती हैं। हालांकि प्रिंसिपल के खिलाफ लगे आरोप खारिज कर दिए गए, लेकिन अदालत ने माना कि उनके पति पी.सी. जैन के खिलाफ अपराध प्रथम दृष्टया साबित होते हैं।

वकीलों के तर्क और पुराना विवाद

याचिकाकर्ताओं के कानूनी सलाहकारों ने अदालत में तर्क दिया था कि इंस्पेक्टर द्वारा दर्ज कराया गया यह मामला प्रिंसिपल द्वारा पहले दर्ज कराई गई छेड़छाड़ की शिकायत का प्रतिशोध था। वह पुराना मामला आईपीसी की धाराओं 341, 354ए और 354 के तहत दर्ज किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप 20 जनवरी 2018 को इंस्पेक्टर को बरी कर दिया गया था।

Share:

Comments

Leave a comment