शादी और बच्ची का हवाला: दिल्ली हाई कोर्ट ने रद्द की पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज FIR

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पोक्सो (POCSO) एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं के तहत दर्ज एक एफआईआर को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि पीड़िता, जो केस दर्ज होते समय नाबालिग थी, अब आरोपी से शादी कर चुकी है और दोनों की एक छोटी बेटी भी है। पीड़िता ने अदालत में हलफनामा देकर स्पष्ट किया कि वह अपने पति के साथ खुश है और अब इस कानूनी लड़ाई को आगे नहीं बढ़ाना चाहती।
यह मामला साल 2024 में दक्षिण जिले में दर्ज कराया गया था। उस समय पीड़िता नाबालिग थी, जिसके कारण मामला गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ था। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से वकील अनिश मोहम्मद और उनकी टीम ने अदालत को बताया कि दोनों पक्षों ने अपने आपसी विवादों को सुलझा लिया है और वे अब एक परिवार के रूप में साथ रह रहे हैं।
पारिवारिक खुशहाली और बच्चे के भविष्य को प्राथमिकता
जस्टिस मधु जैन की बेंच ने मामले की परिस्थितियों पर गौर करते हुए कहा कि जब पीड़िता ने खुद स्वेच्छा से अनापत्ति (No Objection) जताई है और दोनों साथ रह रहे हैं, तो आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का कोई मतलब नहीं रह जाता। अदालत ने माना कि इस स्थिति में केस चलाने से किसी का भला नहीं होगा, बल्कि इससे उनके वैवाहिक संबंधों और उनकी छोटी बेटी के कल्याण पर बुरा असर पड़ सकता है।
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि आईपीसी की धारा 376, पोक्सो एक्ट की धारा 6 और बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 की धारा 9/10 के तहत दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी सभी कानूनी कार्यवाहियों को रद्द किया जाता है। इस फैसले के साथ ही ट्रायल कोर्ट में लंबित सभी प्रक्रियाएं भी समाप्त हो गई हैं।