रिलायंस फाइनेंस जांच: संजय और अमित डांगी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर रद्द, दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत

Kittu Kumari18 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
रिलायंस फाइनेंस जांच: संजय और अमित डांगी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर रद्द, दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत

रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) में वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने संजय डांगी और अमित डांगी के खिलाफ जारी किए गए लुकआउट सर्कुलर (LOC) को रद्द कर दिया है, जिससे अब वे विदेश यात्रा कर सकेंगे।

जस्टिस मधु जैन ने 16 अक्टूबर को दिए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा जांच में पूरा सहयोग करने और विदेश यात्रा रोकने के लिए कोई ठोस कारण न होने की वजह से इन LOC को जारी रखना उचित नहीं है। अदालत ने जोर देकर कहा कि केवल जांच का लंबित होना किसी व्यक्ति के विदेश जाने के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) को अनिश्चित काल तक नहीं छीन सकता।

जांच में सहयोग और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर कोर्ट की टिप्पणी

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अदालत ने संजय डांगी के मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब व्यक्ति जांच प्रक्रिया का पालन कर रहा है, तो अनिश्चित समय के लिए LOC जारी रखना पूरी तरह से अनुचित है। कोर्ट ने पाया कि संजय डांगी ने अब तक जारी सभी समन का जवाब दिया है और वह जांच से बचने की कोशिश नहीं कर रहे थे। साथ ही, उन्हें ED की शिकायत में न तो आरोपी बनाया गया है और न ही गवाह के तौर पर cited किया गया है।

हालांकि, ED ने दलील दी थी कि मामला अभी जांच के दायरे में है और आरोपी के विदेश जाने से जांच प्रभावित हो सकती है, लेकिन कोर्ट ने इसे पर्याप्त आधार नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को 'फ्लाइट रिस्क' (फरार होने का खतरा) बताने के लिए ठोस सबूत होने चाहिए, सिर्फ जांच जारी होना पर्याप्त नहीं है।

राहत देते हुए कोर्ट ने कुछ शर्तें भी रखी हैं:

  • दोनों याचिकाकर्ताओं को एक महीने के भीतर ED को हलफनामा देना होगा कि वे जांच में सहयोग करेंगे।
  • विदेश यात्रा पर जाने से पहले उन्हें ईमेल के जरिए जांच अधिकारी को अपनी पूरी जानकारी (तारीख, फ्लाइट डिटेल और पता) देनी होगी।
  • कोर्ट ने साफ किया कि यह केवल सूचना देने की प्रक्रिया है, विदेश जाने के लिए ED से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि आरोपों की मेरिट पर कोई फैसला लिया गया है। यदि भविष्य में कोई नया सबूत मिलता है, तो ED कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रख सकती है। कोर्ट ने अब ED को निर्देश दिया है कि वह इस फैसले की जानकारी इमिग्रेशन ब्यूरो को दे ताकि रिकॉर्ड अपडेट किया जा सके।

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