Delhi HC Quashes FIRs Against Ex-AAP MLA Kuldeep Kumar in Tiranga Yatra Case Citing Double Jeopardy

दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को कोंडली के पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक कुलदीप कुमार के खिलाफ दर्ज दो First Information Reports (FIRs) को रद्द कर दिया है। अदालत ने 'डबल Jeopardy' (दोहरे दंड) से संवैधानिक संरक्षण का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया है। यह फैसला 15 अगस्त 2021 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर निकाली गई एक ही 'Tiranga Yatra' (तिरंगा यात्रा) जुलूस के लिए दर्ज तीन FIRs को एक ही लगातार प्रक्रिया (Continuous Transaction) मानते हुए दिया गया है। इस फैसले से कुलदीप कुमार और मामले में शामिल अन्य चार लोगों को बड़ी राहत मिली है।
न्यायालय का फैसला और 'टेस्ट ऑफ सेमनेस'
न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा ने फैसला सुनाते हुए 'टेस्ट ऑफ सेमनेस' (एकरूपता की जांच) को लागू किया, जिसमें उद्देश्य की एकता, समय और स्थान की निकटता और कार्रवाई की निरंतरता का 'ट्रिपल टेस्ट' शामिल है। हाईकोर्ट ने पाया कि मामले के तथ्य इन सभी मानदंडों को पूरा करते हैं। सह-याचिकाकर्ता रविंद्र और कुलदीप कुमार को New Ashok Nagar Police Station में दर्ज FIR (FIR No. 353/2021) के सिलसिले में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है और जुर्माना लगाया जा चुका है। अदालत ने निर्धारित किया कि शेष FIRs के तहत उसी घटना के लिए मुकदमा जारी रखना संविधान के अनुच्छेद 20(2) और Criminal Procedure Code (CRPC) की धारा 300 का उल्लंघन होगा।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और कोर्ट की स्पष्टता
दिल्ली पुलिस ने जुलूस के दौरान नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए New Ashok Nagar, Kalyanpuri और Ghazipur पुलिस स्टेशनों में Indian Penal Code (IPC) की धारा 188 के तहत तीन अलग-अलग FIRs दर्ज की थीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इस तथ्य से कि एक रैली अलग-अलग पुलिस स्टेशनों के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से गुजरी, धारा 188 के तहत एक एकल, निरंतर जुलूस कई स्वतंत्र अपराधों में नहीं बदल जाता है। इस फैसले के चलते योगेश, अनीता भट्ट और धीरेंद्र सहित चार अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी इसी घटना को लेकर दर्ज FIRs को रद्द कर दिया गया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि उसके इस फैसले का यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि IPC की धारा 188 के उल्लंघन के लिए कभी भी अलग FIRs दर्ज नहीं की जा सकतीं। अदालत ने यह भी नोट किया कि यदि बाद की घटना अलग है, उसमें कोई दूसरा वर्जन शामिल है, या कोई बड़ी साजिश सामने आती है, तो दूसरी FIR कानूनी रूप से वैध हो सकती है। अधिक जानकारी के लिए मूल स्रोत ANI News पर देख सकते हैं।