दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कोविड फंड के दुरुपयोग मामले में हेमकुंत फाउंडेशन के खिलाफ FIR रद्द

हेमकुंत फाउंडेशन के खिलाफ दर्ज FIR रद्द
दिल्ली हाईकोर्ट ने कोविड-19 मरीजों की मदद के लिए जमा किए गए फंड के कथित दुरुपयोग के मामले में हेमकुंत फाउंडेशन के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। यह एफआईआर साल 2022 में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा दर्ज की गई थी। आरोप था कि फाउंडेशन ने चंदे के पैसों से फिक्स डिपॉजिट बनाया और जमीन खरीदने के लिए एक हेल्थ फर्म को 38 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। अदालत ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप और जांच के दौरान इकट्ठा की गई सामग्री धोखाधड़ी और आप आपराधिक विश्वासघात को नहीं दर्शाती है।
जस्टिस सौरभ बनर्जी का फैसला
जस्टिस सौरभ बनर्जी ने 22 जनवरी 2022 को स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी सभी कार्यवाही को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि जब आईपीसी की धारा 406 और 420 के आवश्यक तत्व ही सामने नहीं आते, तो धारा 120बी के तहत कोई अपराध स्वतंत्र रूप से टिक नहीं सकता। याचिकाकर्ता ने आईपीसी की धाराओं 406, 420 और 120बी के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। एफआईआर के अनुसार, हेमकुंत फाउंडेशन को कोविड-19 महामारी के दौरान राहत देने के नाम पर आम जनता और कॉर्पोरेट इकाइयों से लगभग 74.55 करोड़ रुपये का भारी दान मिला था।
जांच और चंदे के उपयोग पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि जांच के दौरान जुटाए गएmaterial से पैसे के धोखाधड़ी से संग्रह के आरोप साबित नहीं होते हैं। इसके उलट, अभियोजन पक्ष का ही यह मामला है कि याचिकाकर्ता ने कोविड-19 राहत गतिविधियों पर 5.18 करोड़ रुपये की एक बड़ी राशि खर्च की है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए कि याचिकाकर्ता ने भावनात्मक अपील पर दान मांगा, इससे धोखे का मामला नहीं बनता है। फाउंडेशन के वकील ने दलील दी थी कि यह एफआईआर केवल किसानों के आंदोलन के दौरान सेवा करने के बदले में और फाउंडेशन को परेशान करने के लिए प्रतिशोध के रूप में दर्ज की गई थी। अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि जांच से प्रथम दृष्टया आईपीसी की धाराओं 406, 420 और 120बी के तहत अपराध का पता चलता है, लेकिन अदालत ने आखिरकार एफआईआर को खारिज कर दिया।