दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों पर लगाम लगाने की तैयारी, हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

Kittu Kumari13 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों पर लगाम लगाने की तैयारी, हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

राजधानी दिल्ली की सड़कों पर होने वाले प्रदर्शनों और उनसे होने वाली आम जनता की परेशानी को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अब कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से उन याचिकाओं पर जवाब मांगा है, जिनमें दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को विनियमित (Regulate) करने और उनके लिए सख्त नियम बनाने की मांग की गई है। यह मामला तब उठा जब जून और जुलाई 2026 के बीच विपक्षी दलों, छात्र समूहों और नागरिक समाज द्वारा किए गए प्रदर्शनों से शहर की रफ्तार थम गई थी।

सुनवाई के दौरान एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझा। याचिकाओं में यह बात कही गई है कि चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाकर किए गए प्रदर्शनों की वजह से न केवल यातायात बाधित हुआ, बल्कि आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

व्यापारियों का ₹2,000 करोड़ का नुकसान और जंतर मंतर का विवाद

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अदालत में पेश हुए सीनियर काउंसिल संजय पोद्दार ने व्यापारियों की ओर से दलील दी कि कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों पर प्रदर्शनों के कारण व्यापार पूरी तरह ठप हो गया। उन्होंने दावा किया कि त्योहारी सीजन के दौरान इन प्रदर्शनों की वजह से व्यापारियों को करीब 2,000 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। वहीं, वकील ऋषभ सक्सेना की ओर से पेश हुए सीनियर काउंसिल सचिन पुरी ने सार्वजनिक व्यवस्था और लॉजिस्टिक्स के सामने आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया।

इस मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब वकील अंशिका त्रिपाठी की याचिका में जंतर मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद करने के फैसले को चुनौती दी गई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड या सीबीडी ग्राउंड जैसे निर्धारित क्षेत्रों का उपयोग किया जाना चाहिए, जैसा कि दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर 10/2018 और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों में कहा गया है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में भी इस तरह की कुछ कार्यवाही चल रही है, जिसे 15 अक्टूबर 2026 तक के लिए स्थगित किया गया है। इसी कड़ी में दिल्ली हाई कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 के लिए तय की है, जिसमें केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।

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