दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, AI डीपफेक और कमर्शियल दुरुपयोग से सुरक्षित हुए क्रिकेटर युवराज सिंह

दिल्ली हाई कोर्ट ने 1 अगस्त 2026 को पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के पर्सनालिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए एक इंटरिम ऑर्डर जारी किया है। यह फैसला AI-generated डीपफेक, फर्जी पोस्ट और उनके नाम, तस्वीर और पहचान के अवैध कमर्शियल इस्तेमाल को रोकता है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और कमर्शियल वैल्यू को नुकसान पहुंच रहा था। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस ज्योति सिंह ने माना कि युवराज सिंह ने ऐसे उल्लंघनों से सुरक्षा के लिए एक मजबूत मामला पेश किया है।
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तियों के पास अपने पर्सनालिटी एट्रीब्यूट्स पर विशेष मालिकाना हक होते हैं, जिनकी unauthorized exploitation से रक्षा की जानी चाहिए। इस इंटरिम ऑर्डर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जनरेटिव AI, मशीन लर्निंग, डीपफेक, AI चैटबॉट्स, फेस मॉर्फिंग और फेस स्वैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से बनने वाला कंटेंट शामिल है। कोर्ट ने क्रिकेटर के ऐसे किसी भी AI-generated या मैनिपुलेटेड ऑडियो-विजुअल रूपों को बनाने और फैलाने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने पाया कि इस तरह के कंटेंट से सिंह की साख और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है और अनाधिकृत मर्चेंडाइज से उनकी कमर्शियल वैल्यू कम हो रही है। कोर्ट ने कहा कि पर्सनालिटी और प्राइवेसी राइट्स का उल्लंघन करने वालों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
कम्पनियों को दिए गए निर्देश और अगली सुनवाई
इंटरिम निर्देशों के हिस्से के रूप में, कोर्ट ने Meta Platforms को 36 घंटों के भीतर तय URLs हटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा Amazon Seller Services और Flipkart को भी 24 घंटे के भीतर पहचाई गई infringing लिस्टिंग को हटाने का निर्देश दिया गया है। यह सुरक्षा केवल मुकदमे में पहचाने गए URLs तक ही सीमित है, क्योंकि कोर्ट ने भविष्य के कंटेंट पर कोई blanket injunction जारी करने से मना कर दिया है, जिसके चलते किसी भी नए उल्लंघन के लिए नए आवेदन देने होंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर या 30 नवंबर को तय की गई है।