दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: समझौता के आधार पर रद्द नहीं हो सकते पॉक्सो एक्ट के मामले

Kittu Kumari24 September 20261 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: समझौता के आधार पर रद्द नहीं हो सकते पॉक्सो एक्ट के मामले

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण यानी पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों को पीड़िता या उसके परिवार और आरोपी के बीच हुए समझौते के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता है। यह बात जस्टिस सचिन दत्ता ने एक याचिका को खारिज करते हुए कही है। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराध बहुत गंभीर होते हैं और इनका समाज पर बुरा असर पड़ता है। मूल जानकारी के लिए आप ANI की रिपोर्ट देख सकते हैं।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए बताया कि हाईकोर्ट को आपराधिक मामलों को रद्द करने की शक्ति जरूर मिली है, लेकिन गंभीर और जघन्य अपराधों में यह अधिकार आसानी से नहीं दिया जा सकता। बलात्कार जैसे मामलों में केवल समझौते के आधार पर कार्यवाही खत्म नहीं की जा सकती है। अदालत ने माना कि ये मामले निजी प्रकृति के नहीं होते हैं, बल्कि इनका समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

इस मामले में आरोपी पर एक बच्चे के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न करने का आरोप था, जो विश्वास या अधिकार की स्थिति में था। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि समझौते के आधार पर मामले को रद्द करने से कानून का उद्देश्य विफल हो जाएगा। इसके बाद अदालत ने एफआईआर और अन्य कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश को मामले की योग्यता पर कोई टिप्पणी नहीं माना जाना चाहिए। ट्रायल कोर्ट सबूतों के आधार पर मामले के गुण-दोष का फैसला करेगा। अदालत के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में कानूनी प्रक्रिया अपने तय रास्ते पर ही आगे बढ़ेगी।

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