ACP Manasvi Vashishtha विवाद: दिल्ली हाई कोर्ट ने वकीलों को औपचारिक याचिका दायर करने को कहा
दिल्ली हाई कोर्ट ने सस्पेंड ACP Manasvi Vashishtha के वकीलों के खिलाफ कथित बयानों पर औपचारिक याचिका दायर करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सस्पेंड किए गए असिस्टेंट कमिपर ऑफ पुलिस (ACP) Manasvi Vashishtha द्वारा कानूनी समुदाय के सदस्यों के खिलाफ कथित तौर पर की गई धमकी भरी टिप्पणियों के मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu) लेने से इनकार कर दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने मामले का जिक्र करने वाले वकीलों को निर्देश दिया है कि वे इस विषय पर एक औपचारिक याचिका दायर करें।
अदालत ने वकीलों को आश्वासन दिया कि एक बार औपचारिक याचिका जमा हो जाने के बाद मामले की जांच की जाएगी और उसकी सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। बेंच ने निर्देश दिया कि याचिका की एक कॉपी स्टैंडिंग काउंसिल (क्रिमिनल) संजय लाओ को भी सौंपी जाए।
वकीलों ने लगाए गंभीर आरोप
अदालत के सामने पेश हुए वकीलों ने आरोप लगाया कि ACP Manasvi Vashishtha ने उनके खिलाफ बेहद अपमानजनक और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल किया। वकीलों का दावा है कि अधिकारी ने "AK-47" जैसे शब्दों का जिक्र किया और अधिवक्ताओं को "काले कोट के गुंडे" कहकर संबोधित किया।
इस पूरे विवाद की जड़ें 23 अक्टूबर 2026 को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुई एक झड़प में हैं, जहां वकील ललित बंसल पर कथित हमले के बाद पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच तनाव बढ़ गया था। इस घटना के बाद 28 अक्टूबर 2026 को ACP Manasvi Vashishtha और एसएचओ अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया था।
तनाव तब और बढ़ गया जब 2 नवंबर 2026 को सस्पेंड होने से पहले ACP वशिष्ठ ने दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पुलिसकर्मियों के एक विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। इस अनुशासनहीनता के चलते गृह मंत्रालय (MHA) ने उन्हें निलंबित कर दिया। फिलहाल, सेंट्रल दिल्ली कोर्ट बार एसोसिएशन इस मामले में एक समयबद्ध स्वतंत्र जांच और अधिकारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग कर रही है।