दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा आदेश: दृष्टि आईएएस के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ती के डीपफेक और फर्जी कंटेंट हटाने के निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने दृष्टि आईएएस के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ती की अनधिकृत डीपफेक वीडियो, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और अवैध लेक्चर रिकॉर्डिंग को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने छेड़छाड़ किए गए कंटेंट को बनाने के लिए उन्नत डिजिटल टूल की आसानी पर चिंता जताई और ऐसी तकनीक को बंदूक से भी बदतर बताया क्योंकि इसके उपयोग में यूजर की पहचान छिपाना आसान है स्रोत।
कानूनी कार्रवाई और वकीलों की दलीलें
यह कानूनी कार्रवाई विकास दिव्यकीर्ती द्वारा 24 और 25 सितंबर 2026 को दायर मुकदमे के बाद शुरू हुई, जिसमें उनके व्यक्तित्व, प्रचार और कॉपीराइट अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान, विकास दिव्यकीर्ती की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दीया कपूर ने तर्क दिया कि विभिन्न प्लेटफार्मों पर उनकी पहचान और लेक्चर कंटेंट का अनधिकृत उपयोग उनके नैतिक और कानूनी अधिकारों का उल्लंघन है और प्रतिवादियों द्वारा "फेयर यूज" के दावों को खारिज कर दिया। मेटा प्लेटफॉर्म्स का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता वरुण पाठक ने अदालत को सूचित किया कि पहचाने गए 13 में से 11 आपत्तिजनक इंस्टाग्राम रील्स को हटाया जा सकता है। हालांकि, पाठक ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 46 का हवाला देते हुए अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति जताई।
प्लेटफॉर्म्स को आईपी लॉग देने का निर्देश
हटाने के निर्देशों के अलावा, अदालत ने संकेत दिया कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपलोड करने वालों की पहचान करने में मदद के लिए बेसिक सब्सक्राइबर इंफॉर्मेशन और आईपी लॉग प्रदान करने का आदेश देगी। री-कैप्शन या क्लिप किए गए लेक्चर खंडों वाले वीडियो के संबंध में दलीलें बाद के चरण के लिए सुरक्षित रख ली गईं। अदालत ने इस मुकदमे में समन जारी किया है और विकास दिव्यकीर्ती के अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन पर नोटिस भी जारी किया है।