दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: संपत्ति विवाद मामले में फर्जी न्यायिक आदेश पर जांच के निर्देश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने संपत्ति विवाद की सुनवाई के दौरान एक न्यायिक आदेश से छेड़छाड़ का मामला सामने आने के बाद औपचारिक जांच के आदेश दिए हैं। इस मामले की विस्तृत जानकारी के लिए आप ANI News पर जा सकते हैं। अदालत ने 22 सितंबर 2026 को इस फर्जीवाड़े को पकड़ा, जिसमें 19 नवंबर 2024 के असली आदेश में बिना अनुमति के "अंतरिम रोक मंजूर" वाक्यांश जोड़ दिया गया था। यह मामला आरसीए 101/2024 से संबंधित है। मूल दस्तावेज में केवल यह दर्ज था कि प्रतिवादियों के वकील ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी 2025 तय की गई है, साथ ही ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड मंगाए जाने हैं। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 18 सितंबर 2026 को जांच का निर्देश जारी किया, जिसके तहत यह जांच दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल और पुलिस आयुक्त दोनों द्वारा संयुक्त रूप से की जानी है।
यह विसंगति मीना देवी और एक अन्य याचिकाकर्ता द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आई। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली के खेरा खुर्द गांव के विस्तारित लाल डोरा क्षेत्र में स्थित 175 वर्ग गज जमीन से जुड़े कथित धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ कानूनी हस्तक्षेप की मांग की थी। इस घटना से जुड़ी अधिक जानकारी ANI News Report पर उपलब्ध है। याचिकाकर्ताओं ने इससे पहले 7 सितंबर 2026 को दिल्ली पुलिस मुख्यालय में पुलिस आयुक्त को एक औपचारिक शिकायत सौंपी थी। फर्जी दस्तावेज का पता चलने के बाद उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष एक विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की छूट दी है।
याचिकाकर्ताओं को फोरेंसिक तुलना के लिए आदेश के असली और फर्जी दोनों संस्करणों को रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करने को कहा गया है। इस पूरी खबर के बारे में ताजा अपडेट्स के लिए ANI Latest News देखें। अधिकारियों को कानूनी जवाबदेही सुनिश्चित करने के वास्ते इस मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, रीतेश सिंह ने 22 सितंबर 2026 से दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल का पदभार संभाल लिया है।