Delhi High Court का GAC को आदेश: Sai Baba Trust की आपत्तिजनक सामग्री पर 7 दिन में लें फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को Grievance Appellate Committee (GAC) को निर्देश दिया है कि वह Shri Saibaba Sansthan Trust, Shirdi की statutory appeal पर सात से दस दिनों के भीतर फैसला जारी करे। यह ट्रस्ट YouTube वीडियो और अन्य ऑनलाइन कंटेंट को हटाने की मांग कर रहा है, जिसमें Shri Sai Baba और Trust के खिलाफ कथित तौर पर झूठे, मानहानि करने वाले, भड़काऊ और अपमानजनक आरोप लगाए गए हैं। इस मामले की सुनवाई Justice Swarana Kanta Sharma ने की, जिन्होंने GAC के एक reasoned order की तात्कालिकता पर जोर दिया। इस संबंध में अधिक जानकारी ANI News पर देखी जा सकती है।
ट्रस्ट की याचिका और आरोप
ट्रस्ट की याचिका में ऐसे कंटेंट का जिक्र किया गया है जो कथित तौर पर साई बाबा को 'चांद मियां', 'जिहादी', ब्रिटिश जासूस, हत्यारा, बलात्कारी, डकैत और धर्म परिवर्तन कराने वाला बताता है। याचिका में तर्क दिया गया है कि यह सामग्री धार्मिक शत्रुता और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए गढ़े गए निराधार दावे हैं, न कि कोई वास्तविक ऐतिहासिक चर्चा या निष्पक्ष आलोचना। GAC के पास जाने से पहले, ट्रस्ट ने जुलाई 2026 में कई तारीखों पर Google LLC और YouTube के पास शिकायतें दर्ज कराई थीं और विशिष्ट URL उपलब्ध कराए थे। हालांकि, इन प्लेटफॉर्म्स ने कथित तौर पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया और ट्रस्ट को अपलोडर्स से संपर्क करने या कोर्ट का आदेश लाने की सलाह दी। इसके बाद ट्रस्ट ने Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) को एक प्रतिनिधित्व सौंपा और जुलाई 2026 के अंत में GAC के पास अपनी अपील दायर की।
GAC की भूमिका और अदालत का निर्देश
Grievance Appellate Committee, Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के तहत काम करती है। यह भारतीय यूजर्स के लिए एक सुरक्षित और जवाबदेह इंटरनेट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक ऑनलाइन विवाद समाधान तंत्र के रूप में कार्य करती है, जैसा कि GAC Official Website पर बताया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने GAC को निर्देश दिया है कि वह ट्रस्ट की अपील पर विचार करे, तय समय सीमा के भीतर एक reasoned order पास करे और ट्रस्ट को फैसले के बारे में सूचित करे। GAC के फैसले का विवरण देने वाली एक compliance report 19 अगस्त 2026 तक दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष दाखिल की जानी है।