दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: AIIMS को 47 साल बाद मृत कर्मचारी के परिवार को देने होंगे सभी लाभ

दिल्ली हाईकोर्ट ने All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) को एक पूर्व नर्सिंग अर्दली Mohd. Rafiq के कानूनी वारिसों को बकाया वेतन और रिटायरमेंट लाभ देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति Shail Jain द्वारा 6 अगस्त 2026 को दिए गए इस फैसले के साथ लगभग पांच दशकों से चल रही कानूनी लड़ाई समाप्त हो गई है, जो Rafiq के 1979 के इस्तीफे से जुड़ी थी जिसे अदालत ने जबरन दिया गया माना है।
चार दशक पुरानी कानूनी लड़ाई का अंत
Mohd. Rafiq ने 1964 में AIIMS ज्वाइन किया था और अपनी नौकरी जाने के खिलाफ सालों तक लड़ाई लड़ी। Labour Court ने 1998 में फैसला दिया था कि उनका इस्तीफा स्वेच्छा से नहीं दिया गया था। Rafiq का 2013 में निधन होने के बावजूद, हाईकोर्ट ने Labour Court के फैसले को सही ठहराया और नौकरी पर वापस लौटने के उनके लगातार प्रयासों का जिक्र किया। अदालत ने उनकी नौकरी छूटने से लेकर 1996 में उनके तय रिटायरमेंट तक की अवधि के लिए बैक वेजेज (back wages) को 40% से बढ़ाकर 50 कर दिया है।
AIIMS को दिए गए निर्देश और समयसीमा
AIIMS को कानूनी वारिसों के लिए सभी मौद्रिक और रिटायरमेंट लाभों की गणना करने और उन्हें बांटने के लिए बारह सप्ताह का समय दिया गया है। यदि संस्थान इस समयसीमा का पालन करने में विफल रहता है, तो उसे प्रति वर्ष 6% साधारण ब्याज देना होगा। इस फैसले में AIIMS की क्षेत्राधिकार (jurisdiction) से जुड़ी चुनौती को भी खारिज कर दिया गया और यह स्पष्ट किया गया कि इस मामले में Industrial Disputes Act लागू होता है।