दिल्ली उच्च न्यायालय ने उबर, ओला और रैपिडों को महिलाओं की सुरक्षा के लिए जारी किया नोटिस

नयी दिल्ली, 30 सितंबर। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कैब सेवा देने वाली कंपनियों उबर, ओला और रैपिडों के साथ-साथ केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस महिलाओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर जारी किया गया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने सभी संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर के लिए तय की है। अदालत ने कहा कि वह यात्रियों को मिलने वाली सुरक्षा प्रणालियों के लिए टैक्सी ऐप चलाने वाले निजी ऑपरेटरों को जवाबदेह बनाना चाहती है।
याचिका में उठाए गए मुख्य सुरक्षा मुद्दे
यह जनहित याचिका आदित्य सहगल ने दायर की है, जिसमें ऐप आधारित कैब, बाइक टैक्सी और अन्य राइड-हैलिंग सेवाओं का उपयोग करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षा तंत्र में व्यापक सुधार करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि ये कंपनियां दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में दो लाख से अधिक कैब चलाती हैं, लेकिन आरोप लगाया कि रात के समय ड्राइवरों की पर्याप्त जांच नहीं की जाती है। वकील ने कहा कि रात आठ या नौ बजे के बाद यह जांचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है कि ड्राइवर हवाई अड्डों या अन्य प्रमुख स्थानों पर शराब के नशे में तो गाड़ी नहीं चला रहे हैं। याचिका में ड्राइवर के सत्यापन, आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच, वाहन की पहचान, रूट बदलना, आपातकालीन प्रतिक्रिया और पुलिस के साथ समन्वय जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।
याचिका में की गई प्रमुख मांगें
याचिका में यह निर्देश देने की मांग की गई है कि राइड लेने वाले ड्राइवर और वाहन का विवरण ऐप पर दिखाई गई जानकारी से पूरी तरह मेल खाना चाहिए। इसमें यह भी मांग की गई है कि ड्राइवर या वाहन के अवैध रूप से बदले जाने की स्थिति में यात्रियों को बिना किसी जुर्माने के राइड रद्द करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके अलावा, एसओएस (SOS) अलर्ट का जवाब देने के लिए 24 घंटे काम करने वाले कमांड और नियंत्रण केंद्र स्थापित करने की मांग की गई है। इस प्रस्तावित तंत्र के तहत, बुकिंग का विवरण, ड्राइवर की पहचान, वाहन का नंबर और वास्तविक समय का स्थान आपातकालीन सेवाओं और पुलिस के साथ साझा किया जा सकता है।
महिला ड्राइवरों और समयबद्ध शिकायत निवारण की मांग
याचिका में बिना बताए रास्ता बदलने पर स्वचालित अलर्ट, ड्राइवरों के लिए समय-समय पर लिंग-संवेदनशीलता प्रशिक्षण और सुनसान जगहों पर निगरानी तंत्र की भी मांग की गई है। इसमें सत्यापित महिला ड्राइवरों का एक समूह बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिसमें अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं को उपलब्धता के आधार पर ऐसी महिला ड्राइवरों का अनुरोध करने का विकल्प मिल सके। याचिका में ड्राइवर के गलत व्यवहार, उत्पीड़न, मारपीट, रूट बदलने और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की विफलता से संबंधित शिकायतों के लिए एक समयबद्ध शिकायत निवारण तंत्र की मांग की गई है। इसमें ऐप आधारित एग्रीगेटर्स द्वारा समय-समय पर अनुपालन रिपोर्टिंग और दिल्ली में काम करने वाले सभी प्लेटफार्मों पर सुरक्षा उपायों के एक समान कार्यान्वयन की भी मांग की गई है।