दिल्ली उच्च न्यायालय ने बच्चों से जबरन भीख मंगवाने और शोषण के मामले में जवाब मांगा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों, चौराहों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों के शोषण और उनसे जबरन भीख मंगवाए जाने के मामले में दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। यह जनहित याचिका जनसेवा कल्याण सोसायटी के अध्यक्ष अजय अग्रवाल द्वारा दायर की गई है। अदालत ने इस याचिका पर दिल्ली सरकार, पुलिस कमिश्नर, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग और संबंधित बाल कल्याण समितियों से जवाब तलब किया है।
याचिका में अदालत से यह आग्रह किया गया है कि कमजोर बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं जिन्हें कथित तौर पर भीख मांगने के लिए मजबूर किया जा रहा है। वकीलों योगेश गोयल, शिखर सिंह, आर्यन सिंह और सागर शेरावत ने याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी की। उन्होंने दलील दी कि बच्चों का यह लगातार हो रहा शोषण बाल संरक्षण से जुड़ी संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारियों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
याचिका के अनुसार, बच्चों की पहचान करने, उन्हें बचाने, उनकी सुरक्षा करने, उनका पुनर्वास करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने वाली मौजूदा संस्थागत व्यवस्था इस समस्या से निपटने में पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हुई है। याचिका में अधिकारियों से मिलकर काम करने की मांग की गई है। यह भी कहा गया है कि बच्चों को सार्वजनिक स्थानों से केवल कुछ समय के लिए हटाना इस समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं है।
याचिका में बाल सुरक्षा ढांचे के नियमों के अनुसार पीड़ित बच्चों की पहचान करने, उन्हें सुरक्षित बचाने और उनके पुनर्वास के लिए ठोस उपायों की मांग की गई है। यह मामला कानून व्यवस्था या प्रशासनिक काम से जुड़ा नहीं है, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों और उनकी गरिमा से जुड़ा है।