रेस कोर्स मस्जिद की बिजली-पानी काटने पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, NDMC को नोटिस
दिल्ली हाई कोर्ट ने रेस कोर्स मस्जिद की बिजली और पानी काटने पर NDMC से जवाब मांगा है। कोर्ट ने बिना नोटिस सेवाएं बंद करने पर सवाल उठाए।

दिल्ली हाई कोर्ट ने रेस कोर्स मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई अचानक काटने के मामले में नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस रेनू भटनागर की खंडपीठ ने इस कार्रवाई पर हैरानी जताते हुए NDMC को औपचारिक नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि बिना किसी पूर्व सूचना के इन बुनियादी सुविधाओं को कैसे बंद कर दिया गया, जबकि यह संपत्ति वक्फ बोर्ड के तहत अधिसूचित है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून ने एक अपील दायर की। उन्होंने 15 अक्टूबर 2026 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें सिंगल बेंच ने इन सेवाओं को बहाल करने के निर्देश देने से इनकार कर दिया था। याचिकाकर्ता के वकील एम. सुफियान सिद्दीकी ने अदालत को बताया कि यह मस्जिद 2009 में ही ग्रेड-II हेरिटेज स्ट्रक्चर के रूप में अधिसूचित की जा चुकी है, इसलिए इस तरह की मनमानी कार्रवाई अधिकारों का उल्लंघन है।
सरकारी जमीन और सुरक्षा का तर्क
बता दें कि यह मस्जिद प्रधानमंत्री आवास (7 लोक कल्याण मार्ग) के पास स्थित उस जमीन पर है, जिसे केंद्र सरकार सार्वजनिक कार्यों के लिए वापस ले रही है। प्रशासन का तर्क रहा है कि आसपास के इलाकों में चल रहे विध्वंस कार्यों और सार्वजनिक सुरक्षा के मद्देनजर ये प्रतिबंध लगाए गए हैं। हालांकि, 29 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने अदालत को भरोसा दिया था कि जब तक दिल्ली वक्फ बोर्ड के आवेदन की समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक मस्जिद के खिलाफ कोई जबरन तोड़फोड़ नहीं की जाएगी।
अब हाई कोर्ट ने NDMC और दिल्ली वक्फ बोर्ड, दोनों को दो सप्ताह के भीतर अपना आधिकारिक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर 2026 को तय की गई है, जिसमें यह तय होगा कि मस्जिद की बुनियादी सुविधाएं दोबारा शुरू होंगी या नहीं।