जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस को भेजा नोटिस

जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति न मिलने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है और उनसे इस मामले में जवाब मांगा है। जस्टिस अमित महाजन ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर तय की है।
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिव ने दिल्ली पुलिस के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें संगठन के प्रदर्शन की अनुमति खारिज कर दी गई थी। याचिका के मुताबिक, यूथ कांग्रेस ने 25 सितंबर को पुलिस से संपर्क किया था और लगभग 100-150 लोगों के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। संगठन ने यह भी भरोसा दिलाया था कि वे सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की सभी शर्तों का पालन करेंगे।
पुलिस की दलील और कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने दलील दी कि यह याचिका अब बेमानी हो चुकी है क्योंकि जंतर मंतर को अब विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल (Designated Site) के रूप में अधिसूचित नहीं रखा गया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के बाद ही यह फैसला लिया गया है, जिसमें उचित स्थलों की पहचान करने को कहा गया था।
दूसरी ओर, यूथ कांग्रेस के वकीलों ने तर्क दिया कि पुलिस द्वारा अनुमति देने से इनकार करना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत मिलने वाले अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण सभा करने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने बिना परिस्थितियों पर विचार किए केवल गाइडलाइंस का हवाला देकर यांत्रिक तरीके से अनुमति खारिज कर दी।
अदालत ने अब याचिकाकर्ता को नवीनतम घटनाक्रमों के आलोक में अपनी याचिका में जरूरी संशोधन करने का निर्देश दिया है, जिसके बाद 17 नवंबर को इस पर विस्तृत सुनवाई होगी।